क्या मोबाइल देखने से मोतियाबिंद होता है? एक्सपर्ट से समझें मोतियाबिंद के शुरुआती कारण
Motiyabind Causes: आजकल मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है, लेकिन डॉक्टर वंदना कुल्लर का कहना है कि स्क्रीन टाइम ज्यादा होने की वजह से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, इस मौके पर आपको घबराने की जरूरत नहीं है. वक्त पर इसकी पहचान करें और इलाज शुरू करें.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jun 10, 2026 10:15
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स्क्रीन टाइम या मोबाइल का लगातार चलाने के नुकसान. Image Credit- News24
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Eye Stone Reasons: आजकल ज्यादातर लोगों को लगता है कि मोतियाबिंद का सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र है, जबकि मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इस दौरान आंखों में थकान, सूखापन और देखने में परेशानी हो सकती है. कई अध्ययनों में डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या 50 से 65 प्रतिशत तक स्क्रीन टाइम ज्यादा होने वाले लोगों में देखी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल सीधे मोतियाबिंद का कारण बनता है. इसलिए स्क्रीन टाइम को संतुलित रखना जरूरी है, लेकिन सिर्फ मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह से मोतियाबिंद होने की आशंका से घबराने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर वंदना कुल्लर के अनुसार (जो पीएसआरआई हॉस्पिटल ऑफ्थैल्मोलॉजी और कंसल्टेंट हैं) अब स्क्रीन डिवाइस हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इसलिए आपको बहुत ध्यान रखने की जरूरत है.
क्या स्क्रीन टाइम या मोबाइल का लगातार इस्तेमाल मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है?
Image Credit- Freepik
मोतियाबिंद आंख के नेचुरल लेंस के धुंधला होने की स्थिति है, जिसके कारण दृष्टि धीरे-धीरे कम होने लगती है. हालांकि, कुछ मामलों में मधुमेह, आंखों की चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल, धूम्रपान और पराबैंगनी (UV) किरणों के बीच रहने से इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में मोतियाबिंद बढ़ती उम्र इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. हालांकि, मोबाइल की रोशनी से मोतियाबिंद हो यह जरूरी नहीं है.
स्क्रीन टाइम या मोबाइल का लगातार चलाने के नुकसान
मोबाइल चलाने से मोतियाबिंद हो यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है, लेकिन इससे नुकसान जरूर होता है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन, सिर दर्द और आंखों की थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है. एक वैज्ञानिक समीक्षा के अनुसार, डिजिटल डिवाइस का नियमित इस्तेमाल करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोगों में डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण देखे जा सकते हैं.
आंखों से पानी आना
आंखों में दर्द रहना
थकान महसूस होना
नींद की कमी होना
सिरदर्द होना
धुंधलापन और जलन
पलकों पर असर होना
ब्लू लाइट से रेटिना को नुकसान
स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट का लंबे समय तक देखने से आंखों के रेटिना पर प्रभाव डाल सकता है, लेकिन मोतियाबिंद का इससे संबंध नहीं माना गया है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, नॉर्मल डिजिटल डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट को मोतियाबिंद सीधा कारण नहीं माना गया है.
कब हो सकती है संभावना?
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने स्क्रीन ज्यादा देखने के बाद आंखों के स्ट्रेस, थकान या धुंधला दिखना जैसे लक्षणों की शिकायत की है. वहीं, कई अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि प्रतिदिन 4 घंटे या उससे ज्यादा समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में डिजिटल आई स्ट्रेन की संभावना अधिक हो सकती है. हालांकि, इन अध्ययनों में भी मोतियाबिंद और स्क्रीन टाइम के बीच सीधा संबंध नहीं माना गया है.
20-20-20 नियम है फायदेमंद
आंखों की हेल्थ के लिए 20-20-20 नियम अपनाना फायदेमंद हो सकता है. इसके अनुसार, हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर पर कुछ देखना चाहिए. साथ ही, स्क्रीन की ब्राइटनेस सही खना, रोशनी में काम करना, पलकें झपकाना और समय-समय पर आंखों का टेस्ट करवाना भी जरूरी है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Eye Stone Reasons: आजकल ज्यादातर लोगों को लगता है कि मोतियाबिंद का सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र है, जबकि मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल करना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है. इस दौरान आंखों में थकान, सूखापन और देखने में परेशानी हो सकती है. कई अध्ययनों में डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या 50 से 65 प्रतिशत तक स्क्रीन टाइम ज्यादा होने वाले लोगों में देखी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल सीधे मोतियाबिंद का कारण बनता है. इसलिए स्क्रीन टाइम को संतुलित रखना जरूरी है, लेकिन सिर्फ मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह से मोतियाबिंद होने की आशंका से घबराने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर वंदना कुल्लर के अनुसार (जो पीएसआरआई हॉस्पिटल ऑफ्थैल्मोलॉजी और कंसल्टेंट हैं) अब स्क्रीन डिवाइस हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इसलिए आपको बहुत ध्यान रखने की जरूरत है.
क्या स्क्रीन टाइम या मोबाइल का लगातार इस्तेमाल मोतियाबिंद का खतरा बढ़ सकता है?
Image Credit- Freepik
मोतियाबिंद आंख के नेचुरल लेंस के धुंधला होने की स्थिति है, जिसके कारण दृष्टि धीरे-धीरे कम होने लगती है. हालांकि, कुछ मामलों में मधुमेह, आंखों की चोट, लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल, धूम्रपान और पराबैंगनी (UV) किरणों के बीच रहने से इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में मोतियाबिंद बढ़ती उम्र इसका सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है. हालांकि, मोबाइल की रोशनी से मोतियाबिंद हो यह जरूरी नहीं है.
स्क्रीन टाइम या मोबाइल का लगातार चलाने के नुकसान
मोबाइल चलाने से मोतियाबिंद हो यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है, लेकिन इससे नुकसान जरूर होता है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन, सिर दर्द और आंखों की थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है. एक वैज्ञानिक समीक्षा के अनुसार, डिजिटल डिवाइस का नियमित इस्तेमाल करने वाले 50 प्रतिशत से अधिक लोगों में डिजिटल आई स्ट्रेन के लक्षण देखे जा सकते हैं.
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आंखों से पानी आना
आंखों में दर्द रहना
थकान महसूस होना
नींद की कमी होना
सिरदर्द होना
धुंधलापन और जलन
पलकों पर असर होना
ब्लू लाइट से रेटिना को नुकसान
स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट का लंबे समय तक देखने से आंखों के रेटिना पर प्रभाव डाल सकता है, लेकिन मोतियाबिंद का इससे संबंध नहीं माना गया है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, नॉर्मल डिजिटल डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट को मोतियाबिंद सीधा कारण नहीं माना गया है.
कब हो सकती है संभावना?
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 65 प्रतिशत लोगों ने स्क्रीन ज्यादा देखने के बाद आंखों के स्ट्रेस, थकान या धुंधला दिखना जैसे लक्षणों की शिकायत की है. वहीं, कई अध्ययनों में यह भी देखा गया है कि प्रतिदिन 4 घंटे या उससे ज्यादा समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने वाले लोगों में डिजिटल आई स्ट्रेन की संभावना अधिक हो सकती है. हालांकि, इन अध्ययनों में भी मोतियाबिंद और स्क्रीन टाइम के बीच सीधा संबंध नहीं माना गया है.
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20-20-20 नियम है फायदेमंद
आंखों की हेल्थ के लिए 20-20-20 नियम अपनाना फायदेमंद हो सकता है. इसके अनुसार, हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर पर कुछ देखना चाहिए. साथ ही, स्क्रीन की ब्राइटनेस सही खना, रोशनी में काम करना, पलकें झपकाना और समय-समय पर आंखों का टेस्ट करवाना भी जरूरी है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.