एंग्जायटी कम करने में योग या मेडिटेशन कितना असरदार? मेडिकल जर्नल की स्टडी से समझिए

Anxiety and Depression: एंग्जायटी यानी लगातार चिंता, बेचैनी या घबराहट की समस्या में योग और मेडिटेशन को अक्सर मददगार माना जाता है. लेकिन क्या असल में ऐसा होता है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

Anxiety and Depression

क्या योग और मेडिटेशन से सच में एंग्जायटी कम हुई? Image Credit- News24

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Does Yoga Help: आजकल काम का दबाव, नींद की कमी और लगातार तनाव की वजह से एंग्जायटी की समस्या बढ़ती नजर आती है. ऐसे में क्या योग या मेडिटेशन स्ट्रेस और घबराहट को कम करने में मदद कर सकते हैं? इसको लेकर दी नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में पब्लिश एक नई रिसर्च ने इसी सवाल को समझने की कोशिश की है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन आम लोगों पर नहीं, बल्कि इमरजेंसी मेडिसिन पर किया गया था. इसके बाद कुछ चीजें सामने आइए जिसे रिपोर्ट में पब्लिश किया गया है. 

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81 डॉक्टरों पर हुई स्टडी

रिसर्च में कुल 81 लोग थे, जिन्हें तीन बराबर ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप ने हाथा योग किया, दूसरे ने मेडिटेशन की और तीसरे ग्रुप को कुछ करने को नहीं दिया गया. सभी लोगों की एंग्जायटी को शुरुआत में 3 हफ्ते और 6 सप्ताह बाद मापा गया. 

क्या योग और मेडिटेशन से सच में एंग्जायटी कम हुई?

इस स्टडी में एंग्जायटी को बेक एंग्जायटी इन्वेंटरी के जरिए मापा गया. 6 हफ्ते के बाद योग करने वाले लोगों में एंग्जायटी स्कोर 19.67 से घटकर 13.15 हो गया. वहीं मेडिटेशन वाले लोगों में लेवल 18.48 से घटकर 14.70 हो गया. नॉर्मल ग्रुप का स्कोर 19.89 से बढ़कर 20.63 हो गया. इसका सीधा मतलब यह है कि इन दोनों तरीकों के साथ एंग्जायटी कम की जा सकती है. 

क्या हर तरह की एंग्जायटी में काम करेगा?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. यह स्टडी 81 लोगों पर हुई थी और उसकी तारीख सिर्फ 6 हफ्ते थी. इसलिए इसके नतीजों को हर इंसान को मान लेना ठीक नहीं है. इसलिए अगर किसी इंसान को कभी-कभार स्ट्रेस या हल्की बेचैनी होती है योग करके देख लें. 

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कब सिर्फ योग-मेडिटेशन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए?

अगर कभी-कभार होने वाला स्ट्रेस लगातार बना रहे या नींद खराब हो जाए तो आपको ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा, बार-बार पैनिक जैसा महसूस होता है या रोज सोचने की बीमारी हो जाए तो यह सिर्फ योग से सही नहीं होगी. 

तो क्या करना ज्यादा सही है?

अगर किसी इंसान को हल्का स्ट्रेस महसूस होता है तो वो अपने हिसाब से नियमित योग और मेडिटेशन कर सकता है. वहीं, लगातार या गंभीर एंग्जायटी हो तो एक बार डॉक्टर से बात कर लेना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.  

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Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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