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एंग्जायटी कम करने में योग या मेडिटेशन कितना असरदार? मेडिकल जर्नल की स्टडी से समझिए

Anxiety and Depression: एंग्जायटी यानी लगातार चिंता, बेचैनी या घबराहट की समस्या में योग और मेडिटेशन को अक्सर मददगार माना जाता है. लेकिन क्या असल में ऐसा होता है, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

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Does Yoga Help: आजकल काम का दबाव, नींद की कमी और लगातार तनाव की वजह से एंग्जायटी की समस्या बढ़ती नजर आती है. ऐसे में क्या योग या मेडिटेशन स्ट्रेस और घबराहट को कम करने में मदद कर सकते हैं? इसको लेकर दी नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया में पब्लिश एक नई रिसर्च ने इसी सवाल को समझने की कोशिश की है. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अध्ययन आम लोगों पर नहीं, बल्कि इमरजेंसी मेडिसिन पर किया गया था. इसके बाद कुछ चीजें सामने आइए जिसे रिपोर्ट में पब्लिश किया गया है. 

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81 डॉक्टरों पर हुई स्टडी

रिसर्च में कुल 81 लोग थे, जिन्हें तीन बराबर ग्रुप में बांटा गया. एक ग्रुप ने हाथा योग किया, दूसरे ने मेडिटेशन की और तीसरे ग्रुप को कुछ करने को नहीं दिया गया. सभी लोगों की एंग्जायटी को शुरुआत में 3 हफ्ते और 6 सप्ताह बाद मापा गया. 

क्या योग और मेडिटेशन से सच में एंग्जायटी कम हुई?

इस स्टडी में एंग्जायटी को बेक एंग्जायटी इन्वेंटरी के जरिए मापा गया. 6 हफ्ते के बाद योग करने वाले लोगों में एंग्जायटी स्कोर 19.67 से घटकर 13.15 हो गया. वहीं मेडिटेशन वाले लोगों में लेवल 18.48 से घटकर 14.70 हो गया. नॉर्मल ग्रुप का स्कोर 19.89 से बढ़कर 20.63 हो गया. इसका सीधा मतलब यह है कि इन दोनों तरीकों के साथ एंग्जायटी कम की जा सकती है. 

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क्या हर तरह की एंग्जायटी में काम करेगा?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. यह स्टडी 81 लोगों पर हुई थी और उसकी तारीख सिर्फ 6 हफ्ते थी. इसलिए इसके नतीजों को हर इंसान को मान लेना ठीक नहीं है. इसलिए अगर किसी इंसान को कभी-कभार स्ट्रेस या हल्की बेचैनी होती है योग करके देख लें. 

कब सिर्फ योग-मेडिटेशन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए?

अगर कभी-कभार होने वाला स्ट्रेस लगातार बना रहे या नींद खराब हो जाए तो आपको ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा, बार-बार पैनिक जैसा महसूस होता है या रोज सोचने की बीमारी हो जाए तो यह सिर्फ योग से सही नहीं होगी. 

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तो क्या करना ज्यादा सही है?

अगर किसी इंसान को हल्का स्ट्रेस महसूस होता है तो वो अपने हिसाब से नियमित योग और मेडिटेशन कर सकता है. वहीं, लगातार या गंभीर एंग्जायटी हो तो एक बार डॉक्टर से बात कर लेना जरूरी है.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.  

First published on: Aug 16, 2026 11:58 AM

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