Rajesh Bharti
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Test after age 40 : 40 साल की उम्र पूरी होने के बाद शरीर की कई चीजें काम करना धीमा कर देती हैं। वहीं अगर इन पर शुरू में ही ध्यान न दिया जाए तो परेशानी ज्यादा बढ़ सकती है। इनसे बचने के लिए 40 साल के होते ही हर शख्स को 5 टेस्ट जरूर कराने चाहिए। अगर शरीर में कोई समस्या है और उसके बारे में आपको पता नहीं है तो टेस्ट से उसके बारे में पता चल जाता है। इसके बाद समय रहते इलाज करने पर वह बीमारी पैदा होने से पहले ही खत्म हो जाती है। साथ ही बढ़ती उम्र के कारण शरीर में कम होने वाले कुछ चीजों के बारे में भी पता चल जाता है, जिन्हें डाइट और एक्सरसाइज से सुधार सकते हैं।
आपको डायबिटीज हो या न हो, 40 साल के बाद डायबिटीज टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए। डायबिटीज न होने पर हम कई बार ऐसी चीजें खाते रहते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं। इनका तुरंत तो असर नहीं दिखता है लेकिन समय बाद परेशानी देती हैं। ऐसे में डायबिटीज न होने पर भी 40 के बाद उस किनारे पर आकर खड़े हो जाते हैं जब जरा-सी लापरवाही शरीर में शुगर का लेवल गड़बड़ कर सकती है। डायबिटीज टेस्ट कराने से इसके बारे में पता चल जाता है। अगर शुगर लेवल बढ़े तो सचेत हो जाएं और तुरंत ही अपनी डाइट सुधार लें।

40 साल की उम्र के बाद कुछ टेस्ट जरूर कराएं
शरीर फिट रहे, इसके लिए ब्लड प्रेशर सही रहना चाहिए। काम के बढ़ते दबाव और दूसरे कारणों से टेंशन और डिप्रेशन की समस्या होने लगी है। ऐसे में 40 साल के बाद ब्लड प्रेशर (लो बीपी या हाई बीपी) की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए 40 के होते ही ब्लड प्रेशर टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए। अगर आपका ब्लड प्रेशर सही है तो भी इसे हर साल चेक कराएं ताकि सेहत के बारे में पता चलता रहे।
डेंटल टेस्ट दांतों की जांच का तरीका है। दांतों की सही सेहत भी जरूरी है। ज्यादातर लोग दांतों की सेहत पर ध्यान नहीं देते। बाद में दांत खराब हो जाते हैं जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। दांतों में कैविटी और गलत खानपान भी दांतों की हेल्थ पर असर डालती है। 40 के बाद दांतों की मसल्स कुछ कमजोर भी होने लगती हैं। अगर सही देखभाल न करें तो दांत जल्दी टूटकर गिर भी सकते हैं। इसलिए डेंटल एग्जाम जरूर कराएं। जो लोग स्मोकिंग करते हैं या चाय-कॉफी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए डेंटल एग्जाम बहुत जरूरी हो जाता है।
उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर होती जाती हैं। हड्डियों में यह कमजोरी तब आती है जब इनमें कैल्शियम की कमी होने लगती है। हड्डियों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में रहे, इसके लिए ऑस्टियोपोरोसिस टेस्ट जरूर कराएं। इस टेस्ट के जरिए हड्डियों की कमजोरी के साथ-साथ विटामिन-D और बोन डेंसिटी का भी पता लग जाता है। अगर हड्डियां कमजोर हैं तो उन्हें डाइट और एक्सरसाइज से मजबूत बनाया जा सकता है।
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बढ़ती उम्र के साथ किडनी और लिवर की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। इन्हें समय से पहचानने और सही समय पर इलाज के लिए यूरिन टेस्ट जरूर कराएं। वहीं अगर किसी शख्स को मेटाबॉलिज्म से संबंधित कोई समस्या है तो उसके बारे में भी यूरिन टेस्ट से पता चल जाता है। इसके अलावा रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स, प्रोटीन, ग्लूकोज आदि के बारे में भी यूरिन टेस्ट से पता चल जाता है। अगर किसी को कोई समस्या है तो उसका समय रहते इलाज किया जा सकता है।
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