दुनिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे विश्व में कभी भी वर्ल्ड वार जैसी स्थिति बन सकती है. इसका असर निश्चित तौर पर तेल आपूर्ति पर भी होगा. ऐसे में दुनिया के सभी देश ऊर्जा के भंडारण में लगे हुए हैं. भारत भी इसमें शामिल है. तो सवाल ये उठता है कि अगर दुनिया में उथल पुथल जैसा माहौल बनता है तो उसके लिए भारत कितना तैयार है? क्या भारत के पास पर्याप्त मात्रा में तेल रिजर्व है? अगर है तो कितना है और कितने दिनों तक उसमें काम चल सकता है? भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर कल 9 फरवरी 2026 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उनकी जानकारी के अनुसार भारत के तेल भंडार और उसकी क्षमता का पूरा ब्यौरा यहां देखें :
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भारत के पास कितने दिन का तेल है?
आज (फरवरी 2026) की स्थिति के अनुसार, अगर दुनिया में तेल की सप्लाई पूरी तरह बंद हो जाए या कोई बड़ा संकट आ जाए, तो भारत के पास कुल 74 दिनों का बैकअप उपलब्ध है.
भारत के पास रणनीतिक भंडार (SPR), जो सरकारी गुफाओं/टैंकों में सुरक्षित है, वह करीब 9.5 दिनों के लिए पर्याप्त है. वहीं कंपनियों का भंडार (OMCs) यानी तेल कंपनियों जैसे कि IOCL, BPCL के पास मौजूद स्टॉक और पोर्ट्स पर फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म्स को मिलाकर लगभग 64.5 दिनों का तेल उपलब्ध है.
कहां-कहां है भारत का गुप्त खजाना?
भारत ने कच्चे तेल को सुरक्षित रखने के लिए जमीन के अंदर विशाल कावर्न (Caverns) बनाए हैं, जिसे Indian Strategic Petroleum Reserve Limited (ISPRL) मैनेज करता है.
दुनिया की तुलना में भारत कहां खड़ा है?
भारत (India): 74 दिन
अमेरिका (USA): लगभग 600 मिलियन बैरल (दुनिया में सबसे ज्यादा)
चीन (China): लगभग 90 दिनों से अधिक का भंडार
क्या यह 74 दिन काफी हैं?
पेट्रोलियम मंत्री ने संसद में कहा कि वह 74 दिनों के बैकअप के साथ सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन भारत का लक्ष्य इसे जल्द ही 90 दिनों तक ले जाने का है. साल 2020 में जब कोरोना काल में तेल सस्ता हुआ था, तब भारत ने अपने भंडार को पूरी क्षमता से भर लिया था, जिससे देश को लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बचत हुई थी. बता दें कि भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और शोधन (Refining) के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर है.
अगर दुनिया में ‘कोहराम’ मचता है, तो भारत के पास ढाई महीने (74 दिन) का समय है कि वह वैकल्पिक व्यवस्था कर सके या अपनी कूटनीति से संकट को सुलझा सके.