G7 देशों का बड़ा फैसला, 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने पर हुए सहमत; क्या घटेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

मौजूदा संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान संकट और होर्मुज विवाद को माना जा रहा है, जिसकी वजह से कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है. होर्मुज में आवाजाही को लेकर जोखिम अभी भी बाजार की चिंता का कारण है.

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अमेरिकी WTI क्रूड में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. (Photo: AI)

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसका बड़ा कारण G7 देशों द्वारा लिया गया एक बड़ा फैसला बताया जा रहा है. G7 देशों ने शुक्रवार को अपने भंडार से 100 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल और डीजल बाजार में उतारने का फैसला किया है. इस कदम का मकसद दुनिया में ईंधन के संकट को कम करना और लगातार बढ़ रही कीमतों पर कंट्रोल करना है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने G7 नेताओं की वर्चुअल बैठक के बाद बताया कि सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर अगले चार महीनों में अपने आपात तेल भंडार से 100 मिलियन बैरल तक जारी करेंगे.

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डोनाल्ड ट्रंप ने किया राहत का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यूरोप अपने बड़े डीजल भंडार से भारी मात्रा में ईंधन जारी करने पर सहमत हो गया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर कहा कि यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब अमेरिका लगातार सहयोगी देशों से ईंधन की बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने की अपील कर रहा था.

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क्यों बढ़ी थी तेल की कीमतें?

मौजूदा संकट के पीछे सबसे बड़ा कारण ईरान संकट और होर्मुज विवाद को माना जा रहा है, जिसकी वजह से कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है. होर्मुज में आवाजाही को लेकर जोखिम अभी भी बाजार की चिंता का कारण है. इसके अलावा रूस पर प्रतिबंधों के कारण यूरोप को ईंधन आपूर्ति के लिए दूसरे देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ा है. डीजल की कमी ने स्थिति को और गंभीर बनाया. अमेरिका में डीजल की कीमत हाल में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी, जबकि यूरोप में भी कीमतों में तेज उछाल आया.

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कितना सस्ता हुआ क्रूड ऑयल?

G7 देशों के बाद शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 2.6 प्रतिशत गिरकर 99.65 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 89.11 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा. हालांकि भारत में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर देखने को मिलेगा या नहीं, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट के कोई संकेत मिलते नजर नहीं आ रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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