भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Vijay Mallya), ईडी (ED) और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम के बीच कानूनी खींचतान एक बार फिर गरमा गई है. किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग और आपराधिक मामलों को खत्म करने की मांग की थी. माल्या का तर्क था कि बैंकों ने जब्त संपत्तियों को बेचकर अपना सारा पैसा वसूल कर लिया है, इसलिए अब उनके खिलाफ केस खत्म होना चाहिए.
लेकिन अब एसबीआई और कंसोर्टियम बैंकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर माल्या के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं.
कोर्ट में बैंकों और ईडी ने क्या-क्या बड़े खुलासे किए:
बैंकों ने हाईकोर्ट को बताया कि माल्या का यह कहना पूरी तरह गलत है कि सारे बकाये की वसूली हो चुकी है. डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) के जरिए अस्थाई रूप से करीब 10270 करोड़ रुपये और केस दर्ज होने से पहले 544.58 करोड़ रुपये की रिकवरी हुई थी.
रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2026 तक के आंकड़ों और कानूनी खर्चों को मिलाकर विजय माल्या पर अभी भी 8751.86 करोड़ की भारी-भरकम राशि बकाया है. बैंकों ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मामले में अटैच (जब्त) किए गए कुछ शेयर अभी भी सुरक्षित हैं और उन्हें बेचा नहीं गया है.
ED की दो टूक: पैसा लौटाने से अपराध खत्म नहीं हो जाता
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी माल्या की याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. ईडी ने कहा कि PMLA कानून के तहत जब्त संपत्तियों को बैंकों को वापस सौंपना (Restoration of Assets) एक वैधानिक प्रक्रिया है. सिर्फ इसलिए कि बैंकों ने अपनी रकम वसूल कर ली है, माल्या पर लगे धोखाधड़ी (Bank Fraud), आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के संगीन आरोप खत्म नहीं हो जाते. बॉम्बे हाईकोर्ट अब इस हाई-प्रोफाइल मामले पर 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगा.
विजय माल्या 2019 से भगोड़ा आर्थिक अपराधी (Fugitive Economic Offender) घोषित हैं. माल्या की कोशिश थी कि रिकवरी के दम पर केस बंद करवा लिया जाए, लेकिन बैंकों और ईडी ने साफ कर दिया है कि जब तक पूरे 8752 करोड़ रुपये चुकता नहीं होते और मनी लॉन्ड्रिंग केस का फैसला नहीं आता, तब तक माल्या को कोई राहत नहीं मिलने वाली.