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5 से 8 रुपये सस्‍ते हो सकते हैं Petrol, Diesel और CNG के दाम! जानिए अमेरिका-ईरान महा समझौते से भारत में तेल के दाम पर क्‍या होगा असर

भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की रीटेल कीमतों में ₹5 से ₹8 तक की बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है। लेक‍िन यह भारतीय तेल व‍िपणन कंपन‍ियों का अंडर र‍िकवरी यानी नुकसान खत्‍म हो जाने के बाद ही संभव हो सकता है।

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पश्चिम एशिया (West Asia) के अशांत युद्ध के मैदान से दुनिया और विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार युद्धविराम समझौता हो गया है, जिस पर आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस ऐतिहासिक समझौते में दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को तुरंत और बिना किसी शुल्क (टोल-फ्री) के खोलने का बड़ा ऐलान शामिल है।

इस एक कूटनीतिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारत के घरेलू बजट तक हलचल तेज कर दी है। आइए समझते हैं कि इस शांति समझौते से भारत को क्या-क्या बड़े फायदे होने जा रहे हैं।

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होर्मुज स्ट्रेट का खुलना क्यों है भारत के लिए संजीवनी?

ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कोई साधारण जलमार्ग नहीं है। यह दुनिया की ऊर्जा सप्लाई की लाइफलाइन है। दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर जैसे खाड़ी देश इसी रास्ते से अपना निर्यात करते हैं। ये सभी देश भारत की ऊर्जा जरूरतों के सबसे बड़े स्तंभ हैं।

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फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने से इस मार्ग से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई थी। अब नाकाबंदी हटने से जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी, जिससे भारत का माल ढुलाई (Freight) खर्च काफी घट जाएगा।

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आसमान से जमीन पर आईं कच्चे तेल की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस डील की पुष्टि करते हुए दुनिया भर के जहाजों को अपना इंजन शुरू करने और तेल का प्रवाह बहाल करने का आदेश दिया। ट्रंप के इस ऐलान के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। युद्धविराम की खबर आते ही ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत टूटकर $84 प्रति बैरल के करीब आ गई है। फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल $70-$72 प्रति बैरल पर था, जो संकट के चरम पर $119 प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। अब इस नरमी से भारत जैसे बड़े आयातक देश को भारी राहत मिलेगी।

चुनाव का गणित और कीमतों का उतार-चढ़ाव

कच्चे तेल में आई इस गिरावट का सीधा जुड़ाव भारत की घरेलू राजनीति और हालिया चुनावों से भी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लागत बढ़ने के बावजूद सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों को बढ़ने नहीं दिया। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10 प्रति लीटर की भारी कटौती की थी, ताकि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान आम जनता में नाराजगी न फैले। जैसे ही विधानसभा चुनाव संपन्न हुए, तेल कंपनियों ने कीमतों में संशोधन शुरू कर दिया। नतीजतन, पेट्रोल और डीजल में करीब ₹7.50 प्रति लीटर, सीएनजी (CNG) में ₹6 प्रति किलोग्राम और घरेलू एलपीजी (14.2 kg) सिलेंडर में दो किस्तों में ₹89 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई।

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आम जनता को अब कब और कैसे मिलेगा फायदा?

वर्तमान में कीमतें बढ़ने के बावजूद, भारतीय तेल विपणन कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) भारी वित्तीय दबाव में हैं। लागत और रिटेल कीमतों के बीच बड़े अंतर के कारण कंपनियों को इस समय भी प्रतिदिन लगभग ₹650 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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आगे की राह (Outlook):

बाजार विश्लेषकों और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $84 के नीचे आने और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई चेन बहाल होने के बाद तेल कंपनियों का यह अंडर-रिकवरी (नुकसान) बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। जैसे ही कंपनियां मुनाफे की स्थिति में आएंगी, भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की रीटेल कीमतों में ₹5 से ₹8 तक की बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है। इससे न केवल गाड़ियों का ईंधन सस्ता होगा, बल्कि माल ढुलाई सस्ती होने से देश में चौतरफा महंगाई का दबाव भी कम होगा।

First published on: Jun 15, 2026 11:45 AM

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