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‘चीनी की कीमतें बढ़ने का कारण एथेनॉल नहीं’, केंद्र सरकार ने किया स्पष्ट; फिर क्यों बढ़ा शक्कर का भाव?

सरकार ने कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए चीनी के भंडार सीमा को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं और ट्रेड फ्री आयात की अनुमति भी दी है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी की कीमतें बढ़ने का कारण एथेनॉल नहीं है.

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भारत में आम नागरिकों पर महंगाई का बोझ कम होता नजर नहीं आ रहा है. रोजमर्रा की कई चीजों की बढ़ी कीमतों के बीच अब चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी ने जनता की जेब पर असर डाला है. चीनी का इस्तेमाल कई खाने-पीने की चीजों में किया जाता है, कीमतें बढ़ने की वजह से उपभोग करने वाले अन्य खाद्य पदार्थों के भाव बढ़ने की भी आशंका है. हालांकि सरकार ने कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए चीनी के भंडार सीमा को लेकर कड़े नियम जारी किए हैं और ट्रेड फ्री आयात की अनुमति भी दी है. इसके अलावा केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी की कीमतें बढ़ने का कारण एथेनॉल नहीं है.

कितने रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी चीनी की कीमतें?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 20 अगस्त तक देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है, जबकि एक महीने पहले कीमतें करीब 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के अनुसार, चीनी की कीमतों में उछाल एथेनॉल की वजह से हुआ है. दावा किया जा रहा है कि गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल के लिए होने से चीनी के उत्पादन में कमी आई, जिसकी वजह से कीमतें बढ़ गईं. हालांकि केंद्र सरकार के उपभोक्ता मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि एथेनॉल की वजह से चीनी की कीमतें नहीं बढ़ी हैं.

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एथेनॉल से जोड़ना सही नहीं: सरकार

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि हाल के हफ्तों में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और उपभोक्ताओं के लिए चीनी की पर्याप्त उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी को एथेनॉल से जोड़ना सही नहीं है. सरकार के मुताबिक, हालिया तेजी का कारण एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का डायवर्जन नहीं है.

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तो क्या है चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण?

मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा समय में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी कई कारणों का परिणाम है. इनमें अनुमान से कम घरेलू चीनी उत्पादन, त्योहारी सीजन से पहले मांग में बढ़ोतरी, मौसम से गन्ने की फसल को हुआ नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की आपूर्ति में कमी तथा उद्योग के कुछ वर्गों की ओर से सट्टेबाजी और जमाखोरी शामिल हैं.

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दुनिया पर भी बढ़ा आपूर्ति का दबाव

सरकार के अनुसार, उत्पादन अनुमान से कम रहने के बावजूद देश में पर्याप्त चीनी का स्टॉक उपलब्ध है, जिससे अक्टूबर में नए पेराई सत्र की शुरुआत होने तक घरेलू मांग पूरी की जा सकती है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी केवल भारत तक सीमित नहीं है. दुनियाभर में चीनी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर भी कीमतें बढ़ रही हैं. मंत्रालय के मुताबिक, चीनी की आपूर्ति में कमी एक वैश्विक स्थिति है और इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं पड़ रहा है.

First published on: Aug 22, 2026 06:38 AM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक

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