Rupee Vs Dollar: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड ऊंचाई पर, जानें क्‍या है वजह?

जानकारों का मानना है कि आरबीआई के कदमों और इस शांति समझौते के दम पर देश में $50 अरब (50 बिलियन डॉलर) से अधिक का विदेशी निवेश आ सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार देगा।

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कच्‍चे तेल के दाम में आई ग‍िरावट के बाद रुपया मजबूत हो गया है।

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Rupee Vs Dollar: ग्लोबल मार्केट और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते (ceasefire) और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के दोबारा खुलने की खबर से भारतीय मुद्रा को जबरदस्त पंख लग गए हैं। सोमवार, 15 जून को शुरुआती कारोबार में ही भारतीय रुपया (Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे की भारी मजबूती के साथ खुला। फिलहाल रुपया 94.68 प्रति डॉलर के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जो बीते 8 मई के बाद का इसका सबसे मजबूत और उच्चतम स्तर है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.11 के स्तर पर बंद हुआ था।

क्यों आई रुपये में यह तूफानी तेजी?

ट्रंप का बड़ा ऐलान और युद्ध का अंत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है। लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य गतिविधियां तुरंत और स्थायी रूप से रोक दी गई हैं। इस हफ्ते स्विट्जरलैंड में इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।

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कच्चा तेल 4% से ज्यादा क्रैश: इस शांति समझौते का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। $90 प्रति बैरल के पार चल रहा ब्रेंट क्रूड रातों-रात 4 फीसदी से ज्यादा टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गया है, जो अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है।

डॉलर की डिमांड हुई कम: फॉरेक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने से भारतीय तेल कंपनियों को पेमेंट के लिए डॉलर्स की जरूरत कम पड़ेगी। इससे भारत के व्यापार संतुलन (Trade Balance) पर दबाव घटेगा और रुपये को सीधा सपोर्ट मिलेगा। चालू साल में डॉलर-रुपये (USDINR) के लिहाज से इसे अब तक का सबसे सकारात्मक घटनाक्रम माना जा रहा है।

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विदेशी निवेशकों की होगी भारत में वापसी

फरवरी के अंत से शुरू हुए इस युद्ध ने भारत सहित दुनिया के तमाम उभरते बाजारों (Emerging Markets) की कमर तोड़ दी थी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर और डेट मार्केट से भारी मात्रा में फंड्स निकाल लिए थे। अब युद्ध खत्म होने और कच्चे तेल में नरमी आने से भारतीय बाजारों में फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है।

इसके अलावा, पिछले हफ्ते ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में विदेशी पूंजी के फ्लो को बढ़ाने के लिए विदेशी जमा (Overseas Deposits) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECBs) के नियमों को उदार बनाया था। जानकारों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों और इस शांति समझौते के दम पर देश में $50 अरब (50 बिलियन डॉलर) से अधिक का विदेशी निवेश आ सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार देगा।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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