अमेरिका और कनाडा बीच ट्रेड डील कैंसिल, आज से चुकाना होगा 50% टैरिफ; PM कार्नी ने ट्रंप सरकार को दी चेतावनी
जेमिसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को अपने मार्केट में आने वाले किसी भी बड़े निर्यातक देश से बेहतर ऑफर देने की पेशकश की थी, लेकिन कनाडा की नई मांगों और पूर्व में किए गए वादों से पीछे हटने के रवैये ने पूरी बातचीत को विफल कर दिया.
Written By: Akarsh Shukla|Updated: Aug 22, 2026 11:56
Edited By : Akarsh Shukla|Updated: Aug 22, 2026 11:56
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कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर आज लगनी थी मुहर. (Photo: ANI)
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अमेरिका और कनाडा के बीच चल रही ट्रेड डील को लेकर बातचीत आखिरी समय में विफल रही, जिसके बाद अमेरिका ने कनाडा से इंपोर्ट होने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है. यह नई टैरिफ नीति को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप सरकार को आड़े हाथ लिया और पलटवार करने की चेतावनी भी दी. ट्रेड डील की जानकारी देते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने बताया कि कनाडा ने पहले जिन शर्तों पर सहमति जताई थी, अब उन समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया है.
PM मार्क कार्नी ने क्या कहा?
जेमिसन ग्रीर के अनुसार, अमेरिका ने कनाडा को अपने मार्केट में आने वाले किसी भी बड़े निर्यातक देश से बेहतर ऑफर देने की पेशकश की थी, लेकिन कनाडा की नई मांगों और पूर्व में किए गए वादों से पीछे हटने के रवैये ने पूरी बातचीत को विफल कर दिया. दूसरी ओर, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी रुख को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अंतिम समय में अमेरिका द्वारा शर्तों में बदलाव किया गया जो न सिर्फ अनुचित और इंप्रैक्टिकल थे, बल्कि इससे किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा होता है.
गौरतलब है कि कनाडा पर लगाया जाने वाला अमेरिकी टैरिफ बुधवार को आधी रात से लागू होने वाला था, लेकिन बातचीत जारी रखने के लिए ट्रंप प्रशासन ने समय-सीमा तीन दिन के लिए बढ़ा दी थी. इसके बावजूद दोनों पक्ष तय समय के भीतर किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके. आपको बता दें कि अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद दशकों पुराने हैं, जिनमें कनाडाई लकड़ी उद्योग और डेयरी बाजार तक अमेरिकी पहुंच जैसे मुद्दे लंबे समय से विवाद की वजह रहे हैं.
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच पिछले साल करीब 880 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था, और हर दिन लगभग तीन लाख तीस हजार लोग और दो अरब डॉलर मूल्य का सामान दोनों देशों की सीमा पार करता है. हालांकि आशंका जाताई जा रही है कि ट्रेड डील कैंसिल होने का असर दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते के साथ-साथ राजनीतिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है.