‘बाबरी मस्जिद चौक कहलाएगा जैन मंदिर चौक’, पाकिस्तान में मुस्लिम मोहल्लों के रखे हिंदू नाम
पाकिस्तान के लाहौर में कई ऐतिहासिक इलाकों और चौक के पुराने नाम फिर से चर्चा में हैं. दो महीने के भीतर, लाहौर में इस्लामी नामों वाले 9 जगहों को उनके मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत के नाम वापस दे दिए गए हैं.
Written By: Varsha Sikri|Updated: May 19, 2026 00:00
Edited By : Varsha Sikri|Updated: May 19, 2026 00:00
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Credit: Social Media
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अमृतसर से करीब 50 किलोमीटर दूर बसा पाकिस्तान का लाहौर, दशकों तक इस्लामीकरण के असर में रहने के बाद अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है. दो महीनों के भीतर, लाहौर में इस्लामी नामों वाली 9 जगहों को उनके मूल हिंदू या ब्रिटिश विरासत वाले नाम वापस दे दिए गए हैं. इनमें से, इस्लम्पुरा को अब आधिकारिक तौर पर उसके पुराने नाम कृष्णानगर से जाना जाएगा और बाबरी मस्जिद चौक को अब पुराना जैन मंदिर चौक के नाम से जाना जाएगा. इनके बोर्ड भी लगा दिए गए हैं. खास बात ये है कि इन बदलावों के खिलाफ वहां कोई उग्रवादी मोर्चा नहीं खुला.
नवाज शरीफ ने लिया बड़ा फैसला
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने 19 मार्च को एक हाई लेवल बैठक बुलाई. इसमें लाहौर विरासत क्षेत्र पुनरुद्धार (LHAR) परियोजना पर चर्चा हुई. बैठक में लाहौर के क्षेत्रों का नाम बदलकर पुराने हिंदू या ब्रिटिश विरासत काल के नाम पर रखने का फैसला लिया गया. नवाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान को यूरोप से सीखना चाहिए, वो ऐतिहासिक नामों के साथ छेड़छाड़ नहीं करते. उन्होंने कहा कि लाहौर के पुराने नाम पाकिस्तान के इतिहास का हिस्सा हैं, इसीलिए उन्हें बचाना है, बदलना नहीं.
इस्लामपुरा- कृष्णानगर सुन्नत नगर- संतनगर मौलाना जफर चौक- लक्ष्मी चौक बाबरी मस्जिद चौक- जैन मंदिर चौक मुस्तफाबाद- धर्मपुरा सर आगा खान चौक- डेविस रोड अल्लामा इकबाल रोड- जेल रोड फातिमा जिन्ना रोड- क्वींस रोड बाग-ए-जिन्ना- लॉरेंस रोड
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दिल्ली गेट का भी होगा रेनोवेशन
पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज के मुताबिक, लाहौर के परकोटा शहर के सभी आठ गेट, जिनमें दिल्ली गेट भी शामिल है, उनका रेनोवेशन किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, नाम बदलने के दूसरे फेज में पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में भी मूल नामों की घोषणा की जा सकती है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर के बीकनहाउस विश्वविद्यालय में लेक्चरर साद मलिक ने कहा कि ये वाकई एक सुखद बदलाव है. उन्होंने बताया कि वो हमेशा इसे लक्ष्मी चौक ही कहता थे, क्योंकि उनके पिता इसे इसी नाम से पुकारते थे. साद कहते हैं कि नगर निगम ने भले ही कागजों में इसका नाम मौलाना जफर अली चौक रखा हो, लेकिन उनके जैसे कई लोगों के लिए लक्ष्मी चौक उस विरासत का हिस्सा है, जिसका जफर अली खान के नाम से कोई लेना-देना नहीं है. वहीं, जैन मंदिर के पास अनारकली इलाके के मौलाना वाजिद कादरी का मानना है कि इस्लाम को किसी भी मंदिर या गुरुद्वारे से कोई आपत्ति नहीं है. 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक कर दिया गया था, ये एक राजनीतिक फैसला था. उन्होंने बताया कि वहां के लोगों ने इसे कभी बाबरी मस्जिद चौक नहीं कहा. कादरी ने कहा कि जिन पूर्वजों ने ये हिंदू नाम रखे थे, वो भी मुसलमान थे और इससे उनके धर्म पर कोई असर नहीं पड़ा.