ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत नहीं किया था. हालांकि, यह किसी कूटनीतिक दूरी का संकेत नहीं था, बल्कि बहुपक्षीय सम्मेलनों में लागू राजनयिक प्रोटोकॉल के तहत स्वागत की व्यवस्था की गई थी. जिनपिंग की अगवानी केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने की. इसके बाद मोदी-जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें भारत-चीन संबंधों, सीमा पर शांति और व्यापार समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. अब चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर पीएम मोदी शी जिनपिंग को लेकर रिसीव करने खुद एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे थे?
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के दौरों के दौरान स्वागत की व्यवस्था केवल व्यक्तिगत संबंधों से नहीं, बल्कि तय राजनयिक प्रोटोकॉल के आधार पर की जाती है. विदेशी राष्ट्राध्यक्ष जब किसी बहुपक्षीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आते हैं तो आमतौर पर प्रधानमंत्री का हर अतिथि को एयरपोर्ट पहुंचकर रिसीव करना जरूरी नहीं होता. ऐसे मौकों पर केंद्र सरकार की ओर से किसी केंद्रीय मंत्री या वरिष्ठ प्रतिनिधि को अतिथि के स्वागत की जिम्मेदारी सौंपी जाती है. शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने पर भी इसी स्थापित परंपरा का पालन किया गया और केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. इसके बाद उन्हें औपचारिक सम्मान के साथ सम्मेलन स्थल और तय कार्यक्रमों के लिए रवाना किया गया.
पीएम मोदी एयरपोर्ट क्यों नहीं गए?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगवानी के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर नहीं पहुंचे थे. हालांकि, ऐसा सिर्फ चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग के मामले में नहीं है. ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत मेजबान देश के प्रधानमंत्री खुद एयरपोर्ट जाकर नहीं करते हैं. ऐसे बड़े आयोजनों में मेहमान देशों के नेताओं की अगवानी के लिए सरकार की ओर से वरिष्ठ मंत्री या अन्य अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं. यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परंपराओं और तय प्रोटोकॉल के तहत होती है. इसमें सभी संप्रभु देशों को समान दर्जा देने और औपचारिक नियमों का पालन करने पर जोर रहता है.
सरकारी प्रोटोकॉल के तहत विदेशी मेहमानों के आगमन पर प्रतिनिधि स्तर के अनुसार स्वागत की व्यवस्था की जाती है. एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री या अन्य अधिकृत वरिष्ठ प्रतिनिधि अतिथि की अगवानी कर सकते हैं. वहीं, मेजबान प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की औपचारिक मुलाकात सम्मेलन स्थल, द्विपक्षीय बैठक या अन्य निर्धारित कार्यक्रमों के दौरान होती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिनपिंग का स्वागत क्यों नहीं किया?
इस पूरे मामले को समझने के लिए बहुपक्षीय सम्मेलन और द्विपक्षीय यात्रा के बीच अंतर जानना जरूरी है. ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख एक साथ भारत पहुंचते हैं. इस बार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता भी सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे.
ऐसी स्थिति में मेजबान देश के प्रधानमंत्री का हर विदेशी नेता की अगवानी के लिए खुद एयरपोर्ट जाना सामान्य व्यवस्था का हिस्सा नहीं होता. यदि प्रधानमंत्री किसी एक राष्ट्राध्यक्ष का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करते हैं, तो इसे उस देश को विशेष प्राथमिकता देने के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है. इसके बाद कूटनीतिक समानता बनाए रखने के लिए दूसरे देशों के नेताओं के साथ भी इसी तरह की व्यवस्था करनी होगी.
यही वजह है कि बहुपक्षीय सम्मेलनों के दौरान आमतौर पर विदेशी मेहमानों के स्वागत की जिम्मेदारी वरिष्ठ मंत्रियों या अधिकृत सरकारी प्रतिनिधियों को दी जाती है. प्रधानमंत्री की मुलाकात बाद में सम्मेलन स्थल या निर्धारित द्विपक्षीय बैठकों के दौरान होती है. इसलिए जिनपिंग को रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचना किसी खास देश के प्रति दूरी या नाराजगी का संकेत नहीं, बल्कि बहुपक्षीय कूटनीति के तहत अपनाई जाने वाली सामान्य प्रक्रिया है.
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बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दौरे में फर्क
किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार के प्रमुख के भारत दौरे के दौरान स्वागत का तरीका यात्रा की प्रकृति पर निर्भर करता है. अगर कोई नेता द्विपक्षीय या राजकीय यात्रा पर भारत आता है, तो प्रधानमंत्री या सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एयरपोर्ट पर उसका स्वागत कर सकते हैं. खास कूटनीतिक महत्व वाले दौरों में प्रधानमंत्री का खुद मेहमान नेता की अगवानी करना भी सामान्य बात है. लेकिन ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय सम्मेलन की स्थिति अलग है. यहां भारत एक साथ कई देशों के शीर्ष नेताओं की मेजबानी कर रहा है. ऐसे में प्रोटोकॉल इस तरह तय किया जाता है कि सम्मेलन में शामिल सभी देशों को बराबर सम्मान और प्रतिनिधित्व मिले. इसलिए हर नेता की एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री की ओर से व्यक्तिगत अगवानी जरूरी नहीं होती.
सभी देशों के लिए समान कूटनीतिक व्यवहार
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संप्रभु समानता का सिद्धांत काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. बहुपक्षीय मंचों पर सभी सदस्य और भागीदार देशों के साथ समान स्तर का व्यवहार बनाए रखने की कोशिश की जाती है. ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी एक नेता, जैसे शी जिनपिंग या व्लादिमीर पुतिन, की एयरपोर्ट पर खुद अगवानी करते, तो दूसरे देशों के नेताओं के लिए भी इसी तरह का प्रोटोकॉल अपनाने का सवाल उठ सकता था.
ब्रिक्स में कई देश और पार्टनर देश शामिल होते हैं, इसलिए हर राष्ट्राध्यक्ष का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना संभव नहीं है. आम तौर पर ऐसे मौकों पर प्रधानमंत्री सम्मेलन के दौरान नेताओं से मुलाकात करते हैं और जरूरत के अनुसार अलग से द्विपक्षीय बैठक भी करते हैं.