भारत की मेजबानी में 2 दिवसीय ब्रिक्स समिट का आज समापन हो गया. 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स समिट का आयोजन हुआ, जिसमें ब्रिक्स के सभी 11 सदस्य देशों और पार्टनर देशों के नेता शामिल हुए. समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत पहुंचे. चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग 7 साल बाद भारत आए थे, जिन्होंने रूस के साथ मिलकर भारत संग एकजुटता दिखाई. समिट के दौरान सबसे अहम और चर्चित विषय 140 पॉइंट वाला 45 पेजों का घोषणा-पत्र रहा, जिसमें शामिल मुद्दों पर ब्रिक्स देशों ने सहमति जताई.
ब्रिक्स समिट से भारत को क्या मिला?
आतंकवाद के खिलाफ भारत को ब्रिक्स देशों का पूरा समर्थन मिला. ब्रिक्स देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और सीमा पार से आतंकी हमलों, आतंकियों को फंडिंग और पनाह के खिलाफ लड़ाई का संकल्प लिया. भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सदस्यता के लिए भी ब्रिक्स देशों का समर्थन मिला. 18वें ब्रिक्स समिट के सफल आयोजन के लिए ब्रिक्स देशों ने भारत की पीठ थपथपाई. भारत को ब्रिक्स देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने का मौका मिला. डिफेंस, बिजनेस, इकोनॉमिक रिलेशन्स पर नए तरीके से बातचीत करने और कमियां दूर करने का मौका मिला.
ब्रिक्स समिट से चीन को क्या मिला?
ब्रिक्स समिट में सभी सदस्य देशों ने अमेरिका की टैरिफ पॉलिसी और एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया. इस तरह चीन को अमेरिका की मनमानी और दादागिरी के खिलाफ ब्रिक्स देशों का समर्थन मिला. भारत से बिगड़े संबंधों को सुधारने और रिश्तों में गर्माहट लाने का एक और मौका मिला. विश्व स्तर पर अपनी छवि को सुधारने का मौका मिला, क्योंकि ब्रिक्स समिट में पुतिन से ज्यादा लाइमलाइट में चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग रहे. जिन्होंने भारत के साथ मिलकर वैश्विक संकटों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्धता जताई.
ब्रिक्स समिट से रूस को क्या मिला?
ब्रिक्स समिट में सबसे बड़ा फायदा रूस का हुआ, क्योंकि यूक्रेन की जंग के चलते अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस को पूरी दुनिया से अलग-थलग करने का पूरा प्रयास किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक ओर जहां भारत ने रूस का साथ नहीं छोड़ा, वहीं ब्रिक्स समिट में भी पुतिन छाए रहे. उन्होंने ब्रिक्स समिट के लिए भारत आकर दुनिया को बता दिया कि ब्रिक्स देशों की एकजुटता G-7 देशों की एकजुटता से ज्यादा मजबूत और विशाल है. ब्रिक्स समिट में आकर पुतिन अमेरिका की ओर से रूस पर लगाए जा रहे एकतरफा प्रतिबंधों के खिलाफ ब्रिक्स देशों का समर्थन हासिल करने में कामयाब रहे.
ब्रिक्स समिट से ईरान को क्या मिला?
ब्रिक्स समिट में ईरान को इजरायल के खिलाफ ब्रिक्स देशों का समर्थन मिला. ब्रिक्स देशों ने इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और ईरान का समर्थन किया, जबकि अमेरिका ने पूरी कोशिश की थी कि रूस की तरह ईरान को भी पूरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया जाए, लेकिन ब्रिक्स समिट में ईरान को उतना ही महत्व मिला, जितना बाकी देशों को मिला. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने जहां ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से समिट में मुलाकात की, वहीं भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी उनसे मिलीं. वहीं मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों में कई मुद्दों पर बातचीत हुई.
ब्रिक्स समिट से सऊदी अरब को क्या मिला?
ब्रिक्स समिट के जरिए सऊदी अरब ने ईरान के साथ बातचीत की. भारत-रूस और चीन के जरिए सऊदी अरब ने ईरान को समझाने का प्रयास किया कि अमेरिका के चक्कर में वह पड़ोसी देश का नुकसान न करे. क्योंकि हूती विद्रोहियों ने हमला करके सऊदी अरब को लाल सागर में नुकसान पहुंचाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने मामले में सऊदी अरब का साथ देने से इनकार कर दिया है, वहीं तुर्की और पाकिस्तान ने भी पल्ला झाड़ लिया है. सऊदी अरब ईरान और हूती विद्रोहियों के हमले से परेशान है, इसलिए ब्रिक्स समिट के जरिए मुद्दे पर सऊदी अरब ने ईरान से खुलकर बात की
ब्रिक्स समिट पर किस-किस की नजर रही?
ब्रिक्स समिट पर अमेरिका की नजर सबसे ज्यादा रही. अमेरिका खुद को सुपरपावर मानता है और मनमानी करते हुए देशों पर टैरिफ के साथ एकतरफरा प्रतिबंध भी लगा रहा है. ब्रिक्स समिट में आए सदस्य देशों अमेरिका का नाम तो नहीं लिया, लेकिन टैरिफ पॉलिसी के खिलाफ बयान देकर जता दिया कि दुनिया एकपक्ष से नहीं चलेगी. इसलिए ब्रिक्स देशों ने अमेरिका के कहे अनुसार चलने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, वर्ल्ड बैंक और WTO में सुधार की मांग करके अपने इरादे स्पष्ट कर दिए.
ब्रिक्स के सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन करके पाकिस्तान को आइना दिखाया है. क्योंकि भारत समेत दुनियाभर के ज्यादातर देश पाकिस्तान को आतंकवाद का जनक मानते हैं. ब्रिक्स देशों ने समिट में आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराया. वहीं ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद की खिलाफत पाकिस्तान के दोस्त चीन के सामने की.
ब्रिक्स समिट में इजरायल की खिलाफत भी हुई, क्योंकि वह अमेरिका के साथ मिलकर ईरान पर हमले कर रहा है और लेबनान को भी निशाने पर लिया हुआ है. गाजा में नरसंहार को लेकर भी इजरायल को ब्रिक्स देशों की नाराजगी झेलनी पड़ी.