Ghaziabad to Jewar RRTS: गाजियाबाद से जेवर तक दौड़ेगी RRTS, मिनटों में पूरा होगा घंटों का सफर! जानें कितना काम बाकी?
Ghaziabad-Jewar Airport Namo Bharat Rail: दिल्ली-NCR के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है. गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट के बीच चलने वाली नमो भारत रेल प्रोजेक्ट का काम डीपीआर चरण तक पहुंच गया है. जल्द ही लोग इस नए कॉरिडोर की मदद से यात्रा कर सकेंगे.
Written By: Azhar Naim|Updated: Jul 10, 2026 16:06
Edited By : Azhar Naim|Updated: Jul 10, 2026 16:06
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गाजियाबाद से जेवर तक कब शुरू होगी नमो भारत. (Image: AI/Social Media)
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खबर की मुख्य बातें:-
गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर का काम भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में पहुंच गया है.
प्रस्तावित 72.44 किलोमीटर लंबे नमो भारत रेल प्रोजेक्ट में 12 स्टेशन बनाए जाएंगे.
यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद से शुरू होकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए) सिटी से होते हुए जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर समाप्त होगा.
इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक की यात्रा लगभग 40 से 50 मिनट में पूरी हो सकेगी.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है. इसी कड़ी में प्रस्तावित 72.44 किलोमीटर लंबे नमो भारत रेल प्रोजेक्ट गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर का काम भी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में पहुंच गया है. इससे साफ है कि इस प्रोजेक्ट का काम अब बहुत जल्द शुरू हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने इसकी जानकारी दी. बता दें कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से इस कॉरिडोर के बीच यात्रा करना पहले से कई गुना ज्यादा आसान और तेज हो सकेगा. साथ ही, रोजाना के भारी ट्रैफिक जाम और थकाऊ सफर से भी मुक्ति मिलेगी.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नमो भारत रेल गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट रेल परियोजना का प्रस्तावित मार्ग करीब 72.44 किलोमीटर लंबी होगी, गाजियाबाद से शुरू होकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए) सिटी से होते हुए जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर समाप्त होगा. यह कसना के बाद के ग्रामीण क्षेत्र के विपरीत गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है. बता दें कि जिस रूट से यह कॉरिडोर गुजर रहा है, उन क्षेत्रों में तेजी से शहरी और आर्थिक विकास हो रहा है और आने वाले समय में इसकी रफ्तार और बढ़ेगी, जिसे स्थानीय लोगों काफी फायदा मिलेगा.
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12 स्टेशन और दो डिपो से होगा बेहतर संचालन
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के अनुसार इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाएंगे. इसके अलावा दोनों छोर पर दो आधुनिक डिपो भी विकसित किए जाएंगे, जिससे ट्रेनों का संचालन और रखरखाव आसानी से किया जा सकेगा. इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रस्तावित स्टेशनों में गाजियाबाद, गाजियाबाद दक्षिण, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-2, नॉलेज पार्क-5, सूरजपुर, परी चौक, इकोटेक-6, दनकौर, YEIDA नॉर्थ सेक्टर-18, YEIDA सेंट्रल सेक्टर-21 और जेवर एयरपोर्ट शामिल हैं. यह नेटवर्क कई प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को सीधे जोड़ेगा.
40 से 50 मिनट में होगा एयरपोर्ट का सफर
इस नमो भारत कॉरिडोर को अधिकतम 180 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति से दौड़ सके, इसके हिसाब से डिजाइन करने की योजना है. इसके शुरू होने के बाद गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक की यात्रा लगभग 40 से 50 मिनट में पूरी हो सकेगी, जो इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए गेम चेंजर साबित होगा. फिलहाल सड़क मार्ग से यह सफर ट्रैफिक के कारण काफी लंबा हो जाता है. नई हाई-स्पीड सेवा से यात्रियों का समय बचेगा, यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी.
मेट्रो से आसान कनेक्टिविटी और फिल्म सिटी को मिलेगा लाभ
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा इसका बेहतर इंटरचेंज नेटवर्क होगा. परी चौक स्टेशन पर नोएडा मेट्रो की एक्वा लाइन से सीधा जुड़ाव मिलेगा, जिससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचना आसान होगा. वहीं गाजियाबाद स्टेशन दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन से जुड़ा रहेगा. इसके अलावा YEIDA सेंट्रल सेक्टर-21 स्टेशन भविष्य की नोएडा फिल्म सिटी के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी देने का काम करेगा, जिससे इस क्षेत्र के विकास को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
कितने करोड़ की लागत से तैयार होगा कॉरिडोर
करीब 20,640 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह नमो भारत कॉरिडोर एनसीआर का चौथा क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर होगा. इसके साथ ही नोएडा-फरीदाबाद-गुरुग्राम कॉरिडोर भी डीपीआर चरण में है. वहीं दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-एसएनबी-अलवर जैसे अन्य नमो भारत कॉरिडोरों को भी जल्द मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है. इन परियोजनाओं के लिए शुरुआती सर्वे, भू-तकनीकी जांच और बिजली-पानी जैसी उपयोगिताओं को स्थानांतरित करने का काम पहले से शुरू किया जा रहा है ताकि निर्माण में देरी न हो.
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एनसीआर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
माना जा रहा है कि नमो भारत जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर सिर्फ यात्रा का समय कम नहीं करेंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और शहरी विकास को भी नई दिशा देंगे. बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और लोगों के लिए शहरों के बीच आना-जाना पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा. भविष्य में देशभर में लगभग 2,900 किलोमीटर लंबे नमो भारत नेटवर्क की संभावनाएं भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही हैं, जो भारत के सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान दे सकती हैं.
मुख्य निष्कर्ष:- गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने को लेकर नमो भारत रेल परियोजना पर काम विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के चरण में पहुंच गया है. माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से न सिर्फ यात्रा करने वालों को लाभ मिलेगा, बल्कि कॉरिडोर के पास रहने वालों को भी फायदा मिलेगा.