Rishabh Sharma
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खेल के इतिहास में कुछ लम्हें ऐसे होते हैं जो वक्त को रोक देते हैं. अर्जेंटीना के फुटबॉल कप्तान और दिग्गज लियोनेल मेसी के संन्यास की खबर ने भी दुनिया भर के करोड़ों फैंस को सन्न कर दिया है. पता नहीं कि आपको 2016 की वो शाम याद होगी या नहीं जब कोपा अमेरिका फाइनल हारने के बाद मेसी ने रोते हुए संन्यास लिया था. तब पूरे अर्जेंटीना ने उनसे टीम ना छोड़ने की लगभग भीख मांगी थी.
देश और फैंस के प्यार के आगे वो झुके और उसके बाद जो हुआ वो किसी सुनहरे सपने जैसा था. 2021 में कोपा अमेरिका और 2022 में फीफा वर्ल्ड कप जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया. आज 39 साल के मेसी अपने सभी अधूरे सपने पूरे कर चुके हैं और यह संन्यास अब किसी हार की हताशा के साथ नहीं बल्कि एक सुकून भरा फैसला है. यानी इंटरनेशनल फुटबॉल का सबसे चहेता बाज़ीगर लियोनेल मेसी अब अपने देश के लिए दोबारा कभी अपना जादू नहीं दिखाएंगे.
कोई भी खिलाड़ी वक्त की रफ्तार को मात नहीं दे सकता. इसी तर्क को आगे जोड़ते हुए मैं एक और बात कहता हूं कि शायद मेसी ने भी इस कड़वे सच को अपना लिया है. 2026 वर्ल्ड कप फाइनल में स्पेन से मिली हार के बाद मैदान पर खड़े मेसी की आंखों में एक अजीब सी खामोशी तैर रही थी. अपने फुटबॉल करियर के सबसे बड़े फैसले को लेकर खुद मेसी ने बताया है कि संन्यास का वो खत उन्होंने 21 जुलाई को ही लिख लिया था.
फिर इसी बीच उनके पिता जॉर्ज का 68 साल की उम्र में निधन हो गया. यानी वो पिता जिन्होंने एक बीमार और कमज़ोर बच्चे को बार्सिलोना के मशहूर क्लब तक पहुंचाया. दूसरे शब्दों में लियोनेल मेसी की ज़िंदगी के पहले सुपरहीरो का इस कदर चले जाना उन्हें एक बहुत गहरा ज़ख्म दे गया. यही वजह रही कि मेसी अपने फैसले को दुनिया के सामने लाने में थोड़े लेट हो गए.
Twenty years. One legend. Lionel Andrés Messi.#FIFAWorldCup pic.twitter.com/uhruB8pOO9
— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) August 31, 2026
फुटबॉल को पसंद करने वाले लाखों फैंस शायद आज भी एक मुद्दे पर बहस कर सकते हैं. फिर भी मेरा ये मानना है कि अब ये बहस खत्म हो जानी चाहिए. दरअसल सालों तक दुनियाभर में अनगिनत फैंस इस बहस में उलझे रहे हैं कि पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनेल मेसी में कौन ज़्यादा महान है ? जवाब में मैं कहता हूं कि रोनाल्डो यकीनन एक गज़ब की मशीन हैं. उनकी फिटनेस और 146 इंटरनेशनल गोल उन्हें फुटबॉल का यकीनन महानायक या शायद ऑलटाइम बेस्ट में शुमार करते हैं.
लेकिन जब बात असली ‘GOAT’ की होगी तो मेसी उस रेस में बहुत आगे खड़े मिलते हैं. रोनाल्डो का खेल जहां ताकत और रफ्तार पर टिका है वहीं मेसी खेल की खूबसूरत कविता जैसे दिखते है. जब फुटबॉल उनके पैरों में होती है तो लगता है जैसे कोई जादू हो रहा हो. 8-8 बैलन डिओर खिताब और वर्ल्ड कप ट्रॉफी इस बात का पक्का सबूत हैं. मैं तो ‘ताल ठोक के’ कहता हूं कि मेसी सिर्फ गोल नहीं दागते वो पूरे खेल को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं. अगर फुटबॉल में किसी खिलाड़ी को भगवान का दर्जा दिया जा सकता है तो उसके इकलौते दावेदार लियोनेल मेसी हैं.
Gracias, Leo. 🇦🇷#FIFAWorldCup pic.twitter.com/Ff0hWHXXUo
— FIFA World Cup (@FIFAWorldCup) August 31, 2026
वैसे लियोनेल मेसी की बात हो और स्पेनिश क्लब बार्सिलोना का ज़िक्र ना हो ऐसा हो नहीं सकता. यह वही क्लब है जिसने एक ऐसे बीमार और कमज़ोर बच्चे के इलाज का खर्च उठाया. वो भी तब जब एक पिता को छोड़कर किसी को भी उसपर भरोसा नहीं था. मेसी के बचपन को पढ़ चुके ज्यादातर फैंस इस बात को स्वीकार करेंगे कि जिस मेसी को खुद अर्जेंटीना ने लगभग ठुकरा दिया था.
उसी मेसी को बार्सिलोना ने तराशकर फुटबॉल का कोहिनूर बना दिया. यकीनन यहां मेसी की मेहनत और उनके खेल के प्रति समर्पण को श्रेय देना ज़रूरी है लेकिन फिर भी सच्चाई ये है कि अगर बार्सिलोना में मेसी अपना सफर शुरू नहीं करते तो वो कभी दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ी नहीं बन पाते. आज जब मेसी ने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का ऐलान कर दिया है तो दुनिया को इस कहानी का भी पता होना चाहिए.
बहरहाल यहां एक और भी पते की बात सामने आती है. क्योंकि खुद मेसी के लिए क्लब फुटबॉल से कहीं बड़ा लम्हा उस वक्त आया जब उन्होंने अपने देश की नीली-सफेद जर्सी पहनी. बार्सिलोना ने अगर मेसी को एक महान खिलाड़ी बनाया अर्जेंटीना की जर्सी ने उन्हें ‘महानतम’ बना दिया. क्लब लेवल पर चाहे जितने भी रिकॉर्ड मेसी के नाम हों लेकिन अपने देश के लिए जो मुकाम और खिताब उन्होंने हासिल किए हैं वो भी आज इतिहास में दर्ज हो चुके हैं.
Lionel Messi With The Argentina National Team…
— Süleyman Barış (@SSuleymanB1903) August 31, 2026
3 World Cup Finals 🥈🥇🥈
1 World Cup 🏆
2x World Cup MVP Award 🎖️🎖️
U20 World Cup 🏆
U23 Olympic Gold Medal 🥇🎖️
1 Finalissima 🏆
2 Copa América 🏆🏆
Copa América Top Scorer 2021 🎖️
U20 World Cup MVP And Top Scorer 🎖️
…And So… pic.twitter.com/F8Clyq513b
अर्जेंटीना में नंबर-10 की जर्सी कोई आम जर्सी नहीं मानी जाती. फुटबॉल के दीवानों से भरे देश में यह एक बहुत भारी ज़िम्मेदारी है. इसके पीछे वजह भी बेहद खास है क्योंकि पूर्व वर्ल्ड कप विजेता कप्तान डिएगो माराडोना के बाद जिसने भी इस जर्सी को पहना वो भारी दबाव में बिखर गया. मेसी पर भी हमेशा माराडोना जैसा बनने और वर्ल्ड कप लाने का खतरनाक दबाव रहा.
उनकी परवरिश स्पेन में हुई थी इसीलिए शुरुआत में तो उन्हें अर्जेंटीना में एक ‘बाहरी’ तक माना गया. लेकिन मेसी ने अपनी खामोशी, मेहनत और जादुई खेल से हर आलोचक का मुंह बंद कर दिया. आज जब एक बार फिर अर्जेंटीनी फुटबॉल में नंबर-10 जर्सी बेनाम हो रही है. बड़ी बात ये है कि अब इस जर्सी की पहचान सिर्फ माराडोना नहीं बल्कि लियोनेल मेसी का भी नाम होगा. उन्होंने अपने लिए एक ऐसी दुनिया बसाई है जहां पहुंचना किसी भी दूसरे इंसान के बस की बात नहीं होगी.
The end of an era. 🐐🇦🇷
— Star Sports (@StarSportsIndia) August 31, 2026
Lionel Messi announces his retirement from international football, bringing an unforgettable chapter to an end.
World Champion. Copa América winner. Argentina legend. 🏆#Messi #Argentina #Legend #GOAT pic.twitter.com/gLFBxjo8lf
भारत में लियोनेल मेसी के इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास की खबर 31 अगस्त की देर रात लोगों के सामने आई. वैसे तो हमारे मुल्क में क्रिकेट को पूजा जाता है लेकिन फिर भी लाखों भारतीय फैंस में मेसी की दीवानगी को जुनून की हद तक देखा गया है. केरल की गलियों से लेकर कोलकाता के मैदानों तक फुटबॉल के दीवाने नीली-सफेद जर्सी पहने सिर्फ ‘मेसी’ के नारे लगाते रहे हैं. हाल ही में जब फीफा वर्ल्ड कप 2026 खेला गया था, तो भारत में किसी भी दूसरे देश की टीम जर्सी से ज्यादा बिक्री अर्जेंटीना की खासकर नंबर-10 वाली मेसी की जर्सी की ही रही.
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सिर्फ इतना ही नहीं टीवी रेटिंग में भी अर्जेंटीना के मैचों की व्यूअरशिप बंपर नंबर्स के साथ टॉप पर रही. चाहे बात 2011 की करें जब मेसी अपनी टीम के साथ कोलकाता में एक मैच खेलने आए थे या 2026 के उनके दौरे की. उनकी एक झलक पाने के लिए जो जनसैलाब भारत में उमड़ा वो देश के 90 फीसदी खिलाड़ियों, नेताओं और अभिनेताओं को पीछे छोड़ सकता है. हैरानी नहीं कि आज उनके संन्यास की खबर से भारत के भी लाखों फैंस गहरे सदमे में हैं. मानो भारत के किसी अपने बड़े खिलाड़ी ने संन्यास का ऐलान कर दिया हो.
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वैसे ये आर्टिकल पढ़ रहे अपने सभी रीडर्स को ये बात भी बात देना चाहता हूं कि मेसी के इंटरनेशनल फुटबॉल छोड़ने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनका जादू अब मैदान पर नहीं दिखेगा. उनका यह सफर 2028 तक अमेरिकी क्लब इंटर मियामी में चलता रहेगा. फर्क सिर्फ यह होगा कि उनके कंधों पर किसी देश को वर्ल्ड कप जिताने की उम्मीदों का भारी बोझ नहीं होगा.
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अमेरिका के फैंस बहुत लकी हैं जिन्हें इस दिग्गज खिलाड़ी के खेल के आखिरी पल करीब से देखने को मिलेंगे. वहां मेसी अपनी शर्तों पर बिना किसी दबाव के फुटबॉल का मज़ा लेंगे. आखिर में दोहराना चाहूंगा कि मेसी का जाना सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं बल्कि फुटबॉल के सबसे सुनहरे दौर का अंत है. हमारी पीढ़ियां बहुत फक्र से कहेंगी कि हमने उस दौर में सांस ली है और हमने वो मुकाबले देखे हैं जब लियोनेल मेसी मैदान पर खेला करते थे.
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