Mitchell Marsh: ऑस्ट्रेलियाई टीम 3 मैचों की वनडे सीरीज के लिए जिम्बाब्वे के दौरे पर है. 15 सितंबर यानी आज पहला मुकाबला खेला जाएगा. यह मैच ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मिचेल मार्श के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है. वह अपने इंटरनेशनल करियर का 100वां वनडे जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलने जा रहे हैं. जिम्बाब्वे उनके दिल के बेहद करीब है, क्योंकि उन्होंने अपने बचपन के तीन साल यहां गुजारे थे. अब मार्श ने खास इंटरव्यू में बताया कि वह जिम्बाब्वे के लिए खेलने की इच्छा रखते थे.
मिचेल मार्श का जिम्बाब्वे से है खास कनेक्शन
मिचेल मार्श ने 2000 के दशक में अपने बचपन के तीन साल जिम्बाब्वे के शहर हरारे में बिताए. दरअसल, उनके पिता और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ज्योफ मार्श जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम के हेड कोच थे. इसी वजह से मिचेल ने जिम्बाब्वे में काफी समय बिताया और उनका इस जगह से खास कनेक्शन है. वनडे सीरीज की शुरुआत से पहले मिचेल मार्श ने हरारे में अपने बचपन को याद किया और बताया कि वह अपने घरेलू कर्मचारी फराई ‘हैप्पी’ मापोंडेरा के साथ समय बिताया करते थे. 2026 में उनका भावुक रियूनियन हुआ.
जिम्बाब्वे से खेलना चाहते थे मिचेल मार्श
ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मिचेल मार्श ने जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा से मुलाकात की. मार्श का बचपन का किस्सा सुनकर सिकंदर रजा ने मार्श को एक तरह से जिम्बाब्वे का लोकल कह दिया. मार्श ने इसके बाद बड़ा खुलासा किया और कहा, ‘मैं असल में एक मौके पर जिम्बाब्वे के लिए खेलना चाहता था.’ हरारे से खास रिश्ता होने के कारण वह जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम से खेलने की इच्छा रखते थे लेकिन बाद में वह ऑस्ट्रेलिया लौट गए और वहां क्रिकेट खेलना शुरू किया.
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करन परिवार के साथ है खास रिश्ता
कई फैंस को यह जानकर हैरानी होगी कि मिचेल मार्श असल में टॉम, सैम और बेन करन के बचपन के दोस्त हैं. केविन करन जिम्बाब्वे के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्होंने ज्योफ मार्श के साथ काफी समय बिताया. दोनों के रिश्ते अच्छे थे, इसी वजह से उनके बच्चे भी दोस्त थे. मिचेल मार्श ने सैम करन, टॉम करन और बेन करन के साथ बचपन की अपनी यादों को ताजा किया. उन्होंने यह भी बताया कि 2004 में मुगाबे शासन आने के बाद करन परिवार को अपने खेत से निकाल दिया गया था, जिसके बाद वह मार्श परिवार के साथ कुछ समय तक रहे थे.
जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना 100वां वनडे मैच मिचेल मार्श के लिए इसलिए भी खास होगा, क्योंकि उन्होंने अपने वनडे करियर का पहला अर्धशतक हरारे में लगाया था. इसी प्रदर्शन के चलते वह 2015 की वर्ल्ड कप विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा बन पाए थे.
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