28 गधों ने कैसे बंजर जमीन को कर दिया हरा-भरा? 44 साल पहले इजरायल में शुरू हुई ये कहानी बहुत कम लोगों को है पता

बहुत कम लोगों को पता है कि इस प्रोजेक्ट की नींव 1968 में रखी गई थी, उस समय ईरान के शाह के रिजर्व से इजरायल को 11 फारसी ओनागर मिले थे. बाद में 1970 के दशक में इथियोपिया से अफ्रीकी जंगली गधों का एक छोटा समूह भी लाया गया.

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इस प्रोजेक्ट की नींव 1968 में रखी गई थी. (Photo: AI)

रेगिस्तान का नाम सुनते ही जेहन में सूखी जमीन, चट्टानें और पानी के लिए तरसते जीवों का खयाल आता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि गधों का एक छोटा झुंड किसी रेगिस्तान को भी हरे-भरे मैदान में बदल सकता है? जी हां, ऐसा इजरायल के नेगेव रेगिस्तान में हुआ है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बदलाव की कहानी करीब 44 साल पहले शुरू हुई, जब सिर्फ 28 जंगली गधों को रैमन क्रेटर में छोड़ा गया था. आज इनकी संख्या बढ़कर करीब 500 से 600 के बीच पहुंच चुकी है और ये जानवर वहां के इकोसिस्टम में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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आपको बता दें कि रैमन क्रेटर नेगेव रेगिस्तान के बेहद शुष्क इलाकों में स्थित है. कभी यहां जंगली गधे बड़ी संख्या में पाए जाते थे, लेकिन 20वीं सदी की शुरुआत में शिकार के कारण उनका अस्तित्व इस इलाके से लगभग खत्म हो गया. इसके बाद बचाव कार्यक्रम के तहत इन्हें दोबारा उनके प्राकृतिक आवास में बसाने की कोशिश शुरू हुई.

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ईरान और इथियोपिया से आए थे जंगली गधे

बहुत कम लोगों को पता है कि इस प्रोजेक्ट की नींव 1968 में रखी गई थी, उस समय ईरान के शाह के रिजर्व से इजरायल को 11 फारसी ओनागर मिले थे. बाद में 1970 के दशक में इथियोपिया से अफ्रीकी जंगली गधों का एक छोटा समूह भी लाया गया. इन जानवरों का नियंत्रित प्रजनन कराया गया और संख्या बढ़ने के बाद वर्ष 1982 में 28 जंगली गधों को रैमन क्रेटर में छोड़ा गया.

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पानी की तलाश में खोद देते हैं गहरे गड्ढे

इन जंगली गधों की सबसे बड़ी खासियत गर्मी और सूखे के दौरान देखने को मिलती है. पानी की तलाश में गधे अपने मजबूत खुरों से रेतीली और पथरीली जमीन को खोद सकते हैं. कई बार ये करीब 6.5 फीट तक गहरे गड्ढे बना देते हैं. इन गड्ढों में भूमिगत पानी जमा होकर सतह के करीब पहुंच जाता है, जिसका लाभ गधों के अलावा लोमड़ी, गजेल और चमगादड़ जैसे दूसरे जीव भी उठा सकते हैं.

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गोबर से बढ़ी रेगिस्तान में हरियाली

इन गधों का योगदान सिर्फ पानी तक सीमित नहीं रहा. जंगली गधे रेगिस्तान में उगने वाले पौधों और बबूल की फलियों को खाते और इनके पाचन तंत्र से गुजरने के बाद बीज गोबर के साथ अलग-अलग स्थानों तक पहुंच जाता था. इस प्रक्रिया से नए पौधों के उगने की संभावना बढ़ती रही. इसके अलावा इनके पैरों से जमीन पर बने छोटे गड्ढे और उभार बारिश के पानी को कुछ समय तक रोकने में मदद कर करते थे.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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