Puja Path Niyam: पूजा के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है. लोग सुबह उठकर स्नान आदि कर भगवान का ध्यान करते हैं. किसी भी व्रत-त्योहार के मौके पर भक्त सुबह के समय पूजा करते हैं. हालांकि, कई बार रात में पूजा भी की जाती है. रात के समय पूजा करना क्या सही होता है या नहीं? इसको लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल होता है. हालांकि, कई मौके पर रात में पूजा का महत्व होता है. आइये जानते हैं, किन मौके पर रात में पूजा करनी चाहिए. रात में पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
रात्रि पूजा करना नहीं है वर्जित
हिंदू धर्म में रात के समय भगवान की पूजा अर्चना करने की कोई मनाही नहीं है. अक्सर रात के सयम जागरण और कीर्तन का आयोजन किया जाता है. कई देवी-देवताओं की पूजा रात के समय करना अधिक शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान का स्मरण करने, मंत्र जाप, ध्यान और भजन के लिए रात का समय अच्छा होता है.
इन देवी-देवताओं की रात्रि पूजा होती है शुभ
देवी काली और दस महाविद्याओं की पूजा रात के समय करना अधिक शुभ माना जाता है. गुप्त नवरात्रि में रात्रि पूजा का महत्व होता है. प्रदोष व्रत के दौरान और मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव का मंत्र जाप और रुद्राभिषेक रात्रि के समय शुभ होता है. सुंदरकांड का पाठ और हनुमान जी की पूजा शाम के समय करना शुभ होता है. हालांकि, रात्रि पूजा के दौरान कई नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए. आइये इनके बारे में जानते हैं.
रात की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
सुबह की पूजा में लोग स्नान करने के बाद ही शामिल होते हैं. हालांकि, शाम या रात्रि पूजा में शामिल होने से पहले फिर से स्नान कर लेना चाहिए. आप हाथ-मुंह धोकर ही पूजा में शामिल हों. पूजा से पहले पूजा स्थान की अच्छे से सफाई कर लें. भगवान की प्रतिमा स्थापित कर उनके समक्ष दीपक और धूप जलाएं. रात की पूजा में शंख और घंटी बजाने से परहेज करना चाहिए. रात में दुर्वा, फूल और पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए. ऐसे में पूजा के लिए सभी तैयारी पहले से ही कर लें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.