सावन के महीने में हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रहे कांवड़ियों की जत्थे के बीच दो कावड़िये चर्चा का विषय बनी हुई हैं. उत्तर प्रदेश के संभल जिले की रहने वाली दो मुस्लिम महिलाएं तमन्ना मलिक और अनीशा बानो बुर्का पहनकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर आ रही हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वे 11 अगस्त को गाजियाबाद के डासना शिव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगीय
जहां एक तरफ मुजफ्फरनगर पहुंचने पर ‘हिंदू संघर्ष समिति’ के कार्यकर्ताओं ने उन पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया, वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा को लेकर संत समाज में विरोध के सुर भी उठने लगे हैं.
‘मुस्लिम महिलाओं को जागरूक करना मकसद’
मीडिया से बातचीत करते हुए तमन्ना मलिक और अनीशा बानो ने बताया कि उन्होंने यह कदम समाज में मुस्लिम महिलाओं को उनके अधिकारों और आजादी के प्रति जागरूक करने के मकसद से उठाया है. उनकी इस यात्रा में हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ता भी सुरक्षा के लिए उनके साथ चल रहे हैं. दोनों महिलाओं का कहना है कि वे सौहार्द और संदेश देने के लिए 11 अगस्त को डासना मंदिर में पूरे विधि-विधान से गंगाजल अर्पित करेंगी.
किसने उठाए सवाल
बुर्का पहनकर कांवड़ लाने को लेकर योग साधना आश्रम के स्वामी यशवीर ने कड़ा एतराज जताया है. उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा की अपनी एक धार्मिक मर्यादा और परंपरा होती है.
स्वामी यशवीर ने कहा, ‘गोल टोपी या बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. जो भी श्रद्धालु या कांवड़िया यात्रा में शामिल हो रहा है, उसे पारंपरिक कांवड़िया वेश में ही यात्रा करनी चाहिए.’
विरोध के बावजूद यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों ने दोनों महिलाओं का स्वागत किया. मुजफ्फरनगर में हिंदू संघर्ष समिति के सदस्यों ने उन पर फूल बरसाए.