Pranayama Benefits: ‘योग सूत्र’ में महर्षि पतंजलि ने प्राणायाम को शरीर और आत्मा को जोड़ने वाला सबसे मजबूत पुल बताया है. भारत के योग विज्ञान में इसे केवल सांसों का व्यायाम नहीं बल्कि तन-मन की ऊर्जा को बैलेंस करने का सर्वोत्तम उपाय माना गया है. वहीं, भक्ति और अध्यात्म में यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने का माध्यम है, जो आगे चलकर आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर की अनुभूति का दरवाजा खोलता है. आइए जानते हैं, प्राणायाम से यह कैसे और क्यों होता है?
प्राणायाम – योग विज्ञान का मूल
प्राणायाम को भारत के योग विज्ञान का मूल कहा गया है. क्योंकि, यह शरीर की जीवन शक्ति को नियंत्रित करता है. महर्षि पतंजलि के अनुसार, सांसों के स्थिर होने से मन शांत और स्थिर होता है. वहीं, नियमित प्राणायाम शरीर के बंद ऊर्जा चक्र जागृत कर ध्यान की गहरी अवस्था में पहुंचने सहायता करते हैं. यह मन को निर्विकार कर आध्यात्मिक दुनिया में प्रवेश करवाता है.
ईश्वर का अहसास – कैसे?
भारतीय दर्शन और योग विज्ञान के अनुसार, पूरा ब्रह्मांड ‘प्राण शक्ति’ से भरा है. प्राणायाम की प्रक्रिया में हम केवल हवा नहीं ग्रहण करते हैं, बल्कि वातावरण मौजूद ब्रह्मांडीय ऊर्जा को भी ग्रहण करते हैं. मानसिक शोर को शांत होता है, अहंकार धीरे-धीरे घुलता है और मन विचारशून्य हो जाता है, परम आनंद और ईश्वर का अहसास होता है, जो हर कण में व्याप्त हैं.
प्राणायाम के लाभ
प्राणायाम के फायदे अनगिनत हैं, जिसे हम शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के लाभ
के रूप में देखते हैं:
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.