Sawan 2026: आज 30 जुलाई से सावन का आरंभ हो गया है. सावन महीने का समापन 28 अगस्त को होगा. यह पूरा एक महीना महादेव की भक्ति के लिए खास होता है. सावन महीने के पहले दिन आपको शिव जी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. सावन महीने की शुरुआत आयुष्मान योग में हुई है. आज सावन के पहले दिन पूजा शुभ मुहूर्त, मंत्र, पूजा विधि और आरती के बारे में जानते हैं.
सावन का पहला दिन शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- 04:18 ए एम से 04:59 ए एम
प्रातः सन्ध्या- 04:39 ए एम से 05:41 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:54 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:43 पी एम से 03:37 पी एम
सायाह्न सन्ध्या- 07:14 पी एम से 08:16 पी एम
निशिता मुहूर्त- 12:07 ए एम से 12:49 ए एम, 31 जुलाई
ये भी पढ़ें – Numerology: सावन का महीना इन 4 मूलांक के लोगों के लिए रहेगा शुभ, बनेंगे सफलता और तरक्की के योग
भगवान शिव पूजा विधि
सावन महीने में शिवालय जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए. भक्तों को शिवलिंग पर जल के साथ ही दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस से अभिषेक करना चाहिए. इसके साथ ही शिवलिंग पर चंदन, बेल पत्र, धतूरा और भांग अर्पित करें. शिव जी की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और आरती कर पूजा संपन्न करें.
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ नमः शिवाय
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उ.
र्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
ये भी पढ़ें – Ank Jyotish Bhavishyafal: 30 जुलाई को इन्हें मिलेगा उच्च पद और मान-सम्मान, पढ़ें मूलांक 1 से 9 तक का भविष्यफल
शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा
ओम जय शिव ओंकारा
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे
ओम जय शिव ओंकारा
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे
त्रिगुण रूप निरखत त्रिभुवन जन मोहे
ओम जय शिव ओंकारा
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी
ओम जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघंबर अंगे
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे
ओम जय शिव ओंकारा
कर के मध्य कमण्डल चक्र त्रिशूलधारी
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता
ओम जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका
ओम जय शिव ओंकारा
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा
भांग धतूरे का भोजन, भस्मी में वासा
ओम जय शिव ओंकारा
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला
ओम जय शिव ओंकारा
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी
ओम जय शिव ओंकारा
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.