क्या अंतरिक्ष में शरीर बूढ़ा हो जाता है? वैज्ञानिकों ने सुलझाया उम्र का रहस्य, पढ़ें चौंकाने वाला खुलासा
Space Science Aging Mystery: अंतरिक्ष की दुनिया असंख्य चौंकाने वाले रहस्यों से भरी है। अंतरिक्ष वैज्ञानिक आए दिन अंतरिक्ष में जाने वाले यात्रियों और उनके द्वारा जुटाए गए डेटा के आधार पर रिसर्च करते हैं और रहस्यों को दुनिया के सामने उजागर करते हैं। ऐसा ही एक और सुलझाया गया है, आइए उसके बारे में जानते हैं...

बता दें कि अंतरिक्ष में यात्रियों के शरीर में तेजी से कई बदलाव आते हैं। कुछ ही दिन में उनकी उम्र और शरीर ऐसा हो जाता है, जैसे किसी बुजुर्ग इंसान की होती है। स्पेस की जीरो ग्रैविटी में उनकी उम्र बढ़ जाती है और शरीर बूढ़ा हो जाता है, लेकिन इसक मतलब यह नहीं कि वे असर में बूढ़े हो गए हैं, बल्कि धरती पर लौटने के बाद उनका शरीर पहले जैसा नॉर्मल हो जाता है।
माइक्रोगैविटी के कारण शरीर में बदलाव आते
2 / 5वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में गए एस्ट्रोनॉट्स के शरीर पर स्टडी की तो पता चला कि स्पेस मिशन पर एस्ट्रोनॉट्स के शरीर में ऐसे बदलाव दिखे, जैसे उम्र बढ़ने पर आमतौर पर लोगों के शरीर में नजर आते हैं। स्पेस में माइक्रोग्रैविटी, नींद में गड़बड़ी और फिजिकल स्ट्रेस इंसान के शरीर को स्ट्रेस मोड में डाल देते हैं। इसलिए अंतरिक्ष में उनका शरीर बूढ़ा और शरीर कमजोर हो जाता है।
वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रियों पर स्टडी कैसे की?
3 / 5बता दें कि अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने स्पेस में उम्र से जुड़ा रहस्य सुलझाने के लिए Astronauts as a Human Ageing Model नामक रिसर्च की, जिसमें इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में 9 दिन बिताने वाले 4 एस्ट्रोनॉट्स को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने मिशन पर जाने से पहले और मिशन से लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के ब्लड सैंपल लिए, जिनसे शरीर में आए बदलावों को चेक किया गया।
रिसर्च में उम्र-शरीर के बदलाव कैसे जांचे गए?
4 / 5अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ब्लड सैंपल टेस्ट करके अंतरिक्ष यात्रियों की उम्र और शरीर में आए बदलावों को जांचा। उम्र को कैलेंडर से नहीं, बल्कि एपिजेनेटिक क्लॉक्स से मापा। इन क्लॉक्स ने DNA में आए बदलावों के आधार पर उनके शरीर की बायोलॉजिकल उम्र बताई, जो अंतरिक्ष की जीरो ग्रैविटी और एनवायरनमेंट से प्रभावित हुई। स्पेस में क्लॉक्स में अस्थायी बढ़ोतरी हुई और हर एस्ट्रोनॉट के शरीर पर अलग-अलग असर पड़ा।
रिसर्च में वैज्ञानिकों के सामने क्या नतीजा निकला?
5 / 5अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने रिसर्च करते हुए पाया कि धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों की बायोलॉजिकल एज दोबारा पहले जैसी होने लगी। इस बदलाव में इम्यून सिस्टम ने अहम भूमिका निभाई। रिसर्चर्स का कहना है कि स्टडी में साबित हुआ कि स्पेस में इंसान की उम्र में बढ़ोतरी अस्थायी बदलाव होता है, लेकिन यह रिसर्च छोटे मिशन वाले अंतरिक्ष यात्रियों पर की गई थी, लेकिन लंबे स्पेस मिशन में शामिल यात्रियों पर रिसर्च के नतीजे अलग हो सकते हैं। वहीं रिसर्च से यह भी साबित होता है कि इंसान का शरीर कठिन परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदल लेता है।



















