कपड़ों पर बने ये छोटे-छोटे निशान देते हैं बड़े काम की जानकारी, इनका मतलब समझते हैं आप?

कपड़े खरीदते समय हम अक्सर उनका रंग, डिजाइन और फैब्रिक तो देख लेते हैं, लेकिन कपड़ों के अंदर लगे केयर लेबल को नजरअंदाज कर देते हैं. आप ऐसा न करें, क्योंकि इससे फैब्रिक खराब हो जाता है.

washing symbols on clothes
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आपको कपड़ों पर लगे लेबल पर ध्यान देना चाहिए. यह एक तरह का केयर लेबल होता है, जिससे कपड़े का रंग और डिजाइन लंबे वक्त तक सेफ रहता है. Image Credit- AI

कपड़े धोने का मतलब सिर्फ गंदगी को हटाना नहीं, बल्कि इसके रंग और डिजाइन को सही रखना भी होता है. कई बार कपड़े का रंग खराब हो जाता है या डिजाइन हल्का होने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो आपको कपड़ों पर लगे लेबल पर ध्यान देना चाहिए. यह एक तरह का केयर लेबल होता है, जिससे कपड़े का रंग और डिजाइन लंबे वक्त तक सेफ रहता है. इन लेबल पर बने टब, त्रिकोण, चौकोर या प्रेस के निशान सिर्फ डिजाइन नहीं होते, बल्कि ये बताते हैं कि कपड़े को कैसे धोना, सुखाना, ब्लीच करना और प्रेस करना चाहिए. आइए इन निशान के बारे में विस्तार से जानते हैं.

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टब का निशान क्या बताता है?

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कपड़ों के लेबल पर बने पानी से भरे टब का निशान वॉशिंग से जुड़ी जानकारी देता है. टब के नीचे एक लाइन हो तो कपड़े को जेंटल साइकिल में धोने की सलाह हो सकती है. अगर हाथ वाला निशान हो तो कपड़े को हैंड वॉश करने की सलाह दी जाती है. टब पर क्रॉस का निशान हो तो कपड़े को मशीन या फिर हाथ से नहीं धोना चाहिए. इसे भी पढ़ें- गुजरात जैसा गरबा खेलना है? बिना दिल्ली-NCR छोड़े इन 5 जगहों पर मिलेगा असली डांडिया का मजा

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त्रिकोण निशान क्या बताता है?

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कपड़ों पर बना ट्रायंगल ब्लीचिंग से जुड़ा होता है. खाली ट्रायंगल का मतलब यह है कि इसे किसी भी तरह की ब्लीच से धोया जा सकता है. क्रॉस वाला ट्रायंगल बताता है कि कपड़े पर ब्लीच का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बाकी रंगीन कपड़ों पर ब्लीच का गलत इस्तेमाल करने से रंग खराब हो सकता है.

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कपड़ों पर बना चौकोर निशान सुखाने के प्रोसेस को बताता है. अगर इसके अंदर सर्कल बना हो तो यह टम्बल ड्राई की जानकारी देता है. सर्कल के अंदर बने डॉट्स ड्राई टेंप्रेचर को बताता है. इसलिए कपड़े को ड्रायर में डालने से पहले यह निशान जरूर चेक करें और अपने हिसाब से कपड़ों को सुखाएं.

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प्रेस का निशान क्या बताता है?

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कपड़ों पर बना प्रेस यानी इस्त्री का निशान यह बताता है कि कपड़े को किस टेंपरेचर पर प्रेस किया जा सकता है. एक डॉट्स यानी कम तापमान या दो डॉट्स यानी मीडियम तापमान और तीन डॉट्स यानी हाई तापमान वाली प्रेस होती है. आप इन नियम के मुताबिक अपने कपड़ों को प्रेस कर सकते हैं.

क्रॉस निशान क्या बताता है?

क्रॉस निशान क्या बताता है?  6 / 6

कपड़ों के टैग पर बना क्रॉस का निशान यह बताता है कि आइकन से जुड़े काम को कपड़े पर नहीं किया जा सकता. इसमें मशीन में धोने का निशान, प्रेस का निशान, चौकोर निशान या फिर त्रिकोण निशान आदि बनाए जा सकते हैं. इससे कपड़े इफेक्ट हो सकते हैं, जिससे रंग या फिर कपड़ा खराब हो सकता है. इसे भी पढ़ें- आगरा की ऐतिहासिक राम बारात में कैसे पहुंचें? जानिए कब निकलेगी ये है शाही यात्रा

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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