1000000 जिंदगियों पर मंडराया 'संकट', चीन ने 10 लाख बच्चों को परिवारों से क्यों किया दूर, क्या है वन चाइना पॉलिसी?

तिब्बत के करीब 10 लाख बच्चों की जिंदगी पर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि उन्हें जबरदस्ती उनके परिवार से दूर रखा जा रहा है। उन्हें परिवार को छोड़कर चीन के बोर्डिंग स्कूलों में रहने को मजबूर किया जा रहा है। इसकी वजह चीन का मनमाना रवैया है, क्योंकि तिब्बत पर चीन ने कब्जा किया हुआ है।

china tibbat tension
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दरअसल, तिब्बती की संस्कृति में बच्चों की स्कूल एजुकेशन मठों में कराने की परंपरा है। लेकिन चीन तिब्बत में इस परंपरा को बदलकर चीन की स्कूल व्यवस्था को लागू करना चाहता है। यहां के बच्चों पर चीन के मंदारिन भाषी स्कूलों को थोपा जा रहा है। तिब्बत के बच्चों का वहां जबरदस्ती दाखिला कराया जा रहा है।

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शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुस्लिमों पर अत्याचार

शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुस्लिमों पर अत्याचार2 / 6

तिब्बत की संस्कृति को खत्म करके वहां चीनी संस्कृति को चीन प्रचलित करना चाहता है। खासकर शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुस्लिमों के मजहबी मामलों में चीन दखल देता है। विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित करके परेशान करता है। वह इस प्रांत से बच्चों को जबरन उठा रहा है और उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में रहने पर मजबूर कर रहा है।

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बच्चे साल में सिर्फ एक बार अपने घर जाते

बच्चे साल में सिर्फ एक बार अपने घर जाते3 / 6

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जबरन बोर्डिंग स्कूल में भेजे गए बच्चों को साल में एक बार घर जाने दिया जाता है, ताकि तिब्बती संस्कृति का प्रभाव उन पर न पड़े। परिवार से दूर होने की वजह से कई बच्चे बीमारी पड़ गए थे और मानसिक तनाव में आ गए थे, लेकिन उनके परिवारों को उन्हें समझाने के लिए मजबूर किया गया।

बच्चों को तिब्बती भाषा कल्चर से दूर करना मकसद

बच्चों को तिब्बती भाषा कल्चर से दूर करना मकसद4 / 6

चीन की योजना तिब्बत के बच्चों को मंदारिन भाषा के बोर्डिंग स्कूलों में रखकर उन्हें उनकी मूल तिब्बती भाषा और कल्चर से दूर करना है। ज्यादातर बच्चे 4 या 5 साल की उम्र में ही परिवारों से दूर कर दिए गए हैं। चीन के कारण ही करीब एक लाख तिब्बती भारत में दिल्ली, धर्मशाला समेत अलग-अलग शहरों में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।

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तिब्बत पर मंदारिन भाषा थोप रहा है चीन

तिब्बत पर मंदारिन भाषा थोप रहा है चीन5 / 6

बता दें कि चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर कब्जा किया था। 1950 से ही तिब्बत के लोग निर्वासित जिंदगी जी रहे हैं। जो तिब्बत में रहते हैं तो हैं, लेकिन अपनी मूल संस्कृति, धर्म और भाषा से मजबूरी में दूर रहते हैं, क्योंकि चीन उन पर मंदारिन भाषा थोप रहा है। चीन मानवाधिकार का हनन करते हुए बच्चों का भविष्य कंट्रोल कर रहा है।

वन चाइना पॉलिसी का हथियार है शिक्षा

वन चाइना पॉलिसी का हथियार है शिक्षा6 / 6

चीन पूरी दुनिया पर राज करना चाहता था। खासकर अपनी सीमा से सटे देशों पर कब्जा करके वहां राज करना चाहता है। अपनी वन चाइना पॉलिसी के तहत ही तिब्बत को कब्जाने के लिए शिक्षा को हथियार बनाया है। चीन का मानना है कि बच्चों के मन को कंट्रोल करके उनका फ्यूचर कंट्रोल कर सकते हैं। चीन इन बच्चों को अपनी सेना में शामिल कर सकता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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