दरअसल, तिब्बती की संस्कृति में बच्चों की स्कूल एजुकेशन मठों में कराने की परंपरा है। लेकिन चीन तिब्बत में इस परंपरा को बदलकर चीन की स्कूल व्यवस्था को लागू करना चाहता है। यहां के बच्चों पर चीन के मंदारिन भाषी स्कूलों को थोपा जा रहा है। तिब्बत के बच्चों का वहां जबरदस्ती दाखिला कराया जा रहा है।
शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुस्लिमों पर अत्याचार

2 / 6
तिब्बत की संस्कृति को खत्म करके वहां चीनी संस्कृति को चीन प्रचलित करना चाहता है। खासकर शिनजियांग प्रांत में उइगुर मुस्लिमों के मजहबी मामलों में चीन दखल देता है। विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित करके परेशान करता है। वह इस प्रांत से बच्चों को जबरन उठा रहा है और उन्हें बोर्डिंग स्कूलों में रहने पर मजबूर कर रहा है।
बच्चे साल में सिर्फ एक बार अपने घर जाते

3 / 6
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जबरन बोर्डिंग स्कूल में भेजे गए बच्चों को साल में एक बार घर जाने दिया जाता है, ताकि तिब्बती संस्कृति का प्रभाव उन पर न पड़े। परिवार से दूर होने की वजह से कई बच्चे बीमारी पड़ गए थे और मानसिक तनाव में आ गए थे, लेकिन उनके परिवारों को उन्हें समझाने के लिए मजबूर किया गया।
बच्चों को तिब्बती भाषा कल्चर से दूर करना मकसद

4 / 6
चीन की योजना तिब्बत के बच्चों को मंदारिन भाषा के बोर्डिंग स्कूलों में रखकर उन्हें उनकी मूल तिब्बती भाषा और कल्चर से दूर करना है। ज्यादातर बच्चे 4 या 5 साल की उम्र में ही परिवारों से दूर कर दिए गए हैं। चीन के कारण ही करीब एक लाख तिब्बती भारत में दिल्ली, धर्मशाला समेत अलग-अलग शहरों में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।
तिब्बत पर मंदारिन भाषा थोप रहा है चीन

5 / 6
बता दें कि चीन ने 1950 के दशक में तिब्बत पर कब्जा किया था। 1950 से ही तिब्बत के लोग निर्वासित जिंदगी जी रहे हैं। जो तिब्बत में रहते हैं तो हैं, लेकिन अपनी मूल संस्कृति, धर्म और भाषा से मजबूरी में दूर रहते हैं, क्योंकि चीन उन पर मंदारिन भाषा थोप रहा है। चीन मानवाधिकार का हनन करते हुए बच्चों का भविष्य कंट्रोल कर रहा है।
वन चाइना पॉलिसी का हथियार है शिक्षा

6 / 6
चीन पूरी दुनिया पर राज करना चाहता था। खासकर अपनी सीमा से सटे देशों पर कब्जा करके वहां राज करना चाहता है। अपनी वन चाइना पॉलिसी के तहत ही तिब्बत को कब्जाने के लिए शिक्षा को हथियार बनाया है। चीन का मानना है कि बच्चों के मन को कंट्रोल करके उनका फ्यूचर कंट्रोल कर सकते हैं। चीन इन बच्चों को अपनी सेना में शामिल कर सकता है।