भूकंप की भविष्यवाणी क्यों संभव नहीं? सुनामी-तूफान और बारिश का अलर्ट पहले ही दे देते हैं वैज्ञानिक, जानें इसके पीछे का साइंस

अमेरिकी देश वेनेजुएला में लगातार दो बार आए भूकंप ने पूरे देश में तबाही मचा दी. चारों ओर लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाजें, गिरी हुई बिल्डिंग्स, उनमें फंसे हुए लोग... मंजर बेदह डरावना. मलबे में दबे लोग और अपनों को ढूंढ़ते परिजन विज्ञान की उस लाचारी को भी बयां कर रहे हैं जो कि आज के आधुनिक दौर में भी इंसानी जिंदगियों को बचाने के लिए छोटी साबित होती है.

earthquake_74383d
1 / 6

Advertisment

धरती के नीचे होने वाले बदलाव क्यों नहीं चलते हैं पता

धरती के नीचे होने वाले बदलाव क्यों नहीं चलते हैं पता2 / 6

इस दौरान सबसे पहला सवाल यह उठता है कि हमारे वैज्ञानिक अंतरिक्ष की गहराइयों को नाप चुके हैं, वे तीन चार दिन पहले ही आने वाले भयंकर तूफान, सूनामी तक की भी जानकारी दे देते हैं तो फिर वहीं धरती के नीचे होने वाले बदलाव और भूकंप के आगे इतने बेबस क्यों नजर आते हैं? आखिर क्यों विज्ञान आज भी भूकंप आने की सटीक जानकारी नहीं दे पा रहा है.

विज्ञापन

कैसे होती है मौसम की निगरानी

कैसे होती है मौसम की निगरानी3 / 6

आसमान के नीचे होने वाली मौसम से जुड़ी हर आफत जैसे कि चक्रवात, आंधी या बारिश का पता चल जाता है. सैटेलाइट और अत्याधुनिक रडार बादलों की आवाजाही, हवा की रफ्तार और वायुमंडल के बदलते दबाव को लगातार नापते रहते हैं. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने का मौका मिलता है कि कोई तूफान कब-कहां और कितनी ताकत के साथ दस्तक दे सकता है. वहीं भूकंप का सारा खेल धरती के नीचे होता है. यह हमारी नजरों से कोसों दूर जमीन की उस गहराई में होता है, जहां पर कोई भी कैमरा, रडार या फिर सैटेलाइट नहीं झांक सकता है. इसीलिए मौसम का मिजाज समझना आसान है, लेकिन धरती का रौद्र रूप नहीं.

भूकंप का अंदाजा पहले क्यों नहीं लगता है?

भूकंप का अंदाजा पहले क्यों नहीं लगता है?4 / 6

धरती के कई किलोमीटर नीचे की तरफ टेक्टॉनिक प्लेट्स हमेशा बेहद धीमी गति से खिसकती रहती हैं. जब भी ये प्लेट्स एक दूसरे से टकराती हैं तो उनके किनारों पर मौजूद चट्टानों के बीच भारी दबाव और तनाव पैदा होता है. यह तनाव सालों-साल, दशकों तक अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है और फिर एक ऐसा अंतिम बिंदु आता है, जब चट्टानें अचानक टूट जाती हैं. यह पूरी प्रक्रिया इतनी गहराई में और इतनी अचानक होती है कि सतह पर बैठे वैज्ञानिकों को इस बात का पहले से अंदाजा नहीं लग पाता है. जमीन के अंदर इस अदृश्य हलचल को पहले से भांपकर 2-4 दिन पहले से एकदम सटीक जानकारी देने वाली तकनीक दुनिया में अभी नहीं है.

विज्ञापन

फिर कैसे पकड़ ली जाती है तूफान और सुनामी की रफ्तार?

फिर कैसे पकड़ ली जाती है तूफान और सुनामी की रफ्तार?5 / 6

आंधी-तूफान जैसी मौसम प्रणालियां बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती हैं, जिससे उनके रास्ते और ताकत का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. अगर सुनामी की बात की जाए तो वह ज्यादातर भूकंप के बाद आती हैं. जब समुद्र के नीचे की धरती हिलती है, तो पानी की ऊंची-ऊंची लहरों को तट तक पहुंचने में कुछ मिनट या घंटों का समय लगता है. बस इसी समय के फासले का फायदा उठाकर वैज्ञानिक तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए समय रहते सुरक्षित चेतावनी जारी कर देते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान कम होता है.

चेतावनी और भविष्यवाणी में है अंतर

चेतावनी और भविष्यवाणी में है अंतर6 / 6

वैज्ञानिक भले ही यह न बता पाएं कि किस शहर में कब भूकंप आएगा लेकिन अगर हम पुराने इतिहास को देखें तो वो यह जरूर बता सकते हैं कि कौन इलाका कितना संवेदनशील है. इसे ही भूकंप का पूर्वानुमान कहते हैं. इसके अलावा आजकर अर्थक्वेक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जाता है.

विज्ञापन

Get Breaking News First and Latest Updates from India and around the world on News24. Follow News24 on Facebook, Twitter.

First published on:

Read more: About our editorial guidelines and standards here.

लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
... और पढ़ें
विज्ञापन