कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट के साथ पेट्रोल-डीजल के रेट में गिरावट आ सकती है। क्योंकि ओपेक प्लस संगठन में शामिल 22 में से 21 देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने का फैसला किया है। लेकिन सऊदी अरब ने खुद को इस फैसले से बाहर रखा है। वहीं इराक ने ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने का ऐलान किया है।
मांग से ज्यादा हो जाएगी सप्लाई

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बता दें कि ओपेक प्लस के 21 देशों ने लगातार 5वें महीने क्रूड ऑयल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला किया है। ग्लोबल ट्रेडर्स के अनुसार, आने वाले महीनों में ग्लोबल वैश्विक ऑयल की सप्लाई मांग से ज्यादा होगी। इससे जहां कच्चे तेल की कीमतें गिरेंगी, वहीं भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल का रेट भी कम हो जाएगा।
188000 बैरल प्रति दिन उत्पादन बढ़ेगा

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बता दें कि बीते दिन OPEC+ की मीटिंग हुई, जिसमें अगस्त महीने से ऑयल प्रोडक्शन टारगेट को 188000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमति बनी। जून और जुलाई में इसी तरह उत्पादन कोटा में बढ़ोतरी की गई थी। 7 देशों सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान ने अप्रैल से जुलाई के बीच 800000 बैरल प्रति दिन उत्पादन किया।
चुनौतियां भी खड़ी हैं OPEC+ के सामने

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OPEC+ संगठन लगातार ऑयल प्रोडक्शन बढ़ा रहा है, लेकिन इसके लिए संगठन को अंदरूनी दबाव भी झेलना पड़ रहा है। क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इस साल की शुरुआत में प्रोडक्शन समझौते से खुद को अलग कर लिया था, क्योंकि वह ज्यादा तेल उत्पादन का दबाव नहीं लेना चाहता और क्षमता के अनुसार ही उत्पादन करना चाहता है।
ज्यादा उत्पादन मतलब सस्ता पेट्रोल-डीजल

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OPEC+ ने ग्लोबल मार्केट के हालातों के मद्देनजर धीरे-धीरे ऑयल प्रोडक्शन बहाल करने की रणनीति अपनाई। अगर यह रणनीति जारी रही तो लोगों के लिए कच्चे तेल की कम कीमतों का मतलब ईंधन की कम लागत होगा। तेल उत्पादक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सरकारी आय पर दबाव डाल सकती है, लेकिन जनता के फायदे के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी है।
भारत ओपेक प्लस देशों से तेल खरीदता

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ओपेक प्लस दुनिया में तेल उत्पादक देशों का सबसे बड़ा समूह है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% से 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और इसमें ओपेक प्लस देशों की बहुत बड़ी हिस्सेदारी है। भारत अपनी जरूरत पूरी करने के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा हिस्सा इराक और सऊदी अरब से खरीदता है।
भारत में घट सकते पेट्रोल डीजल के रेट

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अगर ओपेक प्लस देश तेल का उत्पादन बढ़ाएंगे तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ जाएगी। इससे कच्चे तेल की कीमतें कम होंगी। परिणामस्वरूप भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की संभावना बढ़ जाएगी। क्योंकि जब बाजार में किसी चीज की सप्लाई बढ़ती है और मांग उतनी ही रहती है तो उसका रेट गिर जाता है।