रिटायरमेंट के बाद कहां 'गायब' हो जाते हैं प्लेन? जानिए- करोड़ों के जहाज के साथ क्या होता है
आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाले विशालकाय विमानों का भी एक निश्चित सफर होता है. औसतन 25 से 30 साल तक यात्रियों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचाने के बाद, इन विमानों को रिटायर कर दिया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रिटायर होने के बाद ये प्लेन कहां जाते हैं? क्या इन्हें कचरे में फेंक दिया जाता है या इनका कोई दूसरा इस्तेमाल भी होता है? विमानों के रिटायरमेंट के पीछे सिर्फ उम्र ही नहीं, बल्कि ईंधन की खपत और मेंटेनेंस जैसे कई वजह भी होती हैं.

आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाले विशालकाय विमानों का भी एक निश्चित सफर होता है. औसतन 25 से 30 साल तक यात्रियों को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंचाने के बाद, इन विमानों को रिटायर कर दिया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रिटायर होने के बाद ये प्लेन कहां जाते हैं? क्या इन्हें कचरे में फेंक दिया जाता है या इनका कोई दूसरा इस्तेमाल भी होता है? विमानों के रिटायरमेंट के पीछे सिर्फ उम्र ही नहीं, बल्कि ईंधन की खपत और मेंटेनेंस जैसे कई वजह भी होती हैं.
उम्र का पड़ाव
2 / 7एक यात्री विमान आमतौर पर 25-30 साल तक सेवा देता है, जबकि कार्गो प्लेन 40 साल तक उड़ सकते हैं. जब मेंटेनेंस का खर्च कमाई से ज्यादा होने लगता है, तब इन्हें रिटायर कर दिया जाता है.
ईंधन और तकनीक
3 / 7बोइंग 787 और एयरबस A350 जैसे नए विमान कम ईंधन पीते हैं. पुरानी तकनीक वाले विमानों को चलाना एयरलाइंस के लिए घाटे का सौदा साबित होता है, इसलिए उन्हें नई फ्लीट से बदल दिया जाता है.
विमानों का कब्रिस्तान 'Boneyard'
4 / 7रिटायरमेंट के बाद विमान अपनी आखिरी उड़ान 'बोनयार्ड' के लिए भरते हैं. ये अक्सर रेगिस्तानी इलाके होते हैं जहां कम नमी के कारण विमान की बॉडी में जंग नहीं लगती और उन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है.
कीमती कलपुर्जों की रिकवरी
5 / 7बोनयार्ड पहुंचते ही विमान के इंजन, लैंडिंग गियर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महंगे हिस्से निकाल लिए जाते हैं. इन पुर्जों का इस्तेमाल दूसरे चालू विमानों को ठीक करने में किया जाता है.
90% रिसाइकिलिंग
6 / 7अगर विमान उड़ने लायक नहीं बचता, तो उसे काट दिया जाता है. विमान का 90% हिस्सा रिसाइकिल किया जा सकता है, खासकर एल्युमीनियम और टाइटेनियम जैसी कीमती धातुएं.
दूसरा 'जन्म'
7 / 7कई विमान रिटायरमेंट के बाद आलीशान रेस्टोरेंट या म्यूजियम बन जाते हैं. भारत में विशाखापत्तनम का TU-142M म्यूजियम इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां लोग सैन्य विमान को करीब से देख सकते हैं.



















