स्मित मच्छार की बहादुरी ने दिलाई इंडियन नैनी की याद, 9/11 हमले में बचाई थी 2 साल के इजरायली बच्चे की जान

How Indian Nanny Israeli Child: फ्लाईदुबई के इंडियन पायलट आज हर इजरायली नागरिकों के लिए हीरो बन चुके हैं, लेकिन उनकी ये बहादुरी एक और भारतीय की याद दिला रही है, जिसने 18 साल पहले मुंबई हमले के दौरान 2 साल के यहूदी बच्चे की जान बचाई थी.

Indian Nanny @airnewsalerts

इंडियन नैनी सैंड्रा सैमुअल के साथ मोशे होल्ट्जबर्ग (File Photo-X/@airnewsalerts)

Sandra Samuel Saved Moshe Holtzberg: दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में हुई घटना के बाद 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान एक 2 साल के इजरायली बच्चे की जान बचाने वाली इंडियन नैनी की कहानी फिर से चर्चा में आ गई है. दरअसल एक भारतीय पायलट ने 174 यात्रियों को ले जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट को बड़े हादसे से बचाने में मदद की, जिसमें ज्यादातर इजरायली नागरिक सवार थे. इस घटना की तुलना सैंड्रा सैमुअल के काम से की जा रही है, जिन्होंने 9/11 अटैक के दौरान छोटे मोशे होल्ट्जबर्ग की जान बचाई थी. उन हमलों में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मोशे के माता-पिता और एक ज्यूइश सेंटर में मौजूद कई लोगों की हत्या कर दी थी.

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मोशे को बचाने वाली भारतीय नैनी

26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसे और कई जगहों पर एक साथ हमले किए. इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज महल पैलेस होटल, ओबेरॉय-ट्राइडेंट कॉम्प्लेक्स, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल और नरीमन हाउस शामिल थे. तकरीबन 60 घंटे तक चले इस घेराबंदी और हमले में 166 लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए. पीड़ितों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे. नरीमन हाउस एक यहूदी आउटरीच सेंटर था जिसे रब्बी गेवरियल होल्ट्जबर्ग और उनकी वाइफ रिवका चलाते थे. ये मैरिड कपल जो एक और बच्चे के माता-पिता बनने वाले थे, इमारत के अंदर मारे गए 6 लोगों में शामिल थे. उनका 2 साल का बेटा मोशे बच गया.

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सैंड्रा सैमुअल ने मोशे के रोने की आवाज सुनी

जब आतंकवादियों ने नरीमन हाउस पर हमला किया तब सैंड्रा सैमुअल होल्ट्जबर्ग फैमिली के लिए नैनी का काम कर रही थीं. जैसे ही फायरिंग शुरू हुई, उन्होंने एक अन्य कर्मचारी काजी जाकिर हुसैन के साथ इमारत के अंदर शरण ली. घेराबंदी के दौरान उन्होंने मोशे के रोने की आवाज सुनी. सैमुअल और हुसैन ऊपर गए और होल्ट्जबर्ग दंपत्ति को मृत पाया. मोशे अपने माता-पिता के पास था और रो रहा था. सैमुअल ने बच्चे को उठाया और उसे इमारत से बाहर ले आईं, जबकि आतंकवादी अभी भी अंदर ही थे.

डरे हुए छोटे बच्चे के साथ नरीमन हाउस से बाहर भागती सैमुअल की तस्वीर मुंबई हमलों के सबसे मार्मिक पलों में से एक बन गई. हमले में मोशे अपने करीबी परिवार का अकेला सदस्य था जो बच पाया. बाद में उसे इजरायल ले जाया गया, जहां उसके दादा-दादी और रिश्तेदारों ने उसकी परवरिश की. सैमुअल बाद में इजरायल गईं और मोशे के संपर्क में बनी रहीं. साल 2010 में इजरायल ने उनके कामों को देखते हुए उन्हें नागरिकता दी.

भारतीय पायलट की सूझबूझ

फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय पायलट स्मित मच्छार से जुड़ी घटना के बाद सैमुअल की कहानी पर फिर से ध्यान गया है. 30 सितंबर 2026 को जब विमान हवा में था, तब मच्छार पर उनके ओमान के को-पायलट ने हमला किया. चाकू लगने के बावजूद, मुंबई में जन्मे पायलट ने जवाबी कार्रवाई की और कॉकपिट तक पहुंचने में कामयाब रहे, जिससे यात्रियों और क्रू को हमलावर को काबू करने में मदद मिली. खबरों के मुताबिक, फ्लाइट में 174 लोग सवार थे, जिनमें बड़ी तादाद में इजरायली पैसेंजर्स शामिल थे.

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18 साल के फासले पर 2 बहादुरी के कारनामें

सैमुअल और मच्छार का सामना बिल्कुल अलग-अलग हालात से हुआ. सैमुअल एक नैनी थीं जिन्होंने आतंकवादी हमले के दौरान एक बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली. मच्छार एक पायलट थे जिन्होंने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा के लिए हमलावर का मुकाबला किया. इन दोनों घटनाओं के बीच 18 साल का फासला है. दोनों हीरो भारतीय हैं, और दोनों ने इजरायली नागरिकों की जान बचाने में मदद की, और इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए अमर करवा लिया.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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