लक्षद्वीप के खूबसूरत कोरल रीफ्स क्लाइमेट चेंज और समुद्री तापमान में लगातार बढ़ोतरी की वजह से तेजी से तबाह हो रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो द्वीपों की समुद्री बायोडायवर्सिटी, मछली पालन और टूरिज्म पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.
लक्षद्वीप का समुद्री स्वर्ग खतरे में

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हिंद महासागर में मौजूद लक्षद्वीप अपने रंग-बिरंगे कोरल रीफ्स के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इन्हें समुद्र का 'रेनफॉरेस्ट' भी कहा जाता है क्योंकि यहां हजारों समुद्री जीवों को आश्रय मिलता है. लेकिन बढ़ते समुद्री तापमान ने इस प्राकृतिक खजाने को गंभीर खतरे में डाल दिया है.
क्या है कोरल ब्लीचिंग?

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जब समुद्र का पानी नॉर्मल से ज्यादा गर्म हो जाता है, तब कोरल अपने भीतर रहने वाले सूक्ष्म शैवाल (Zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं. इसके कारण कोरल अपना रंग खो देते हैं और सफेद दिखाई देने लगते हैं. इस प्रक्रिया को ‘कोरल ब्लीचिंग’ कहा जाता है.
समुद्री हीटवेव बनी बड़ी वजह

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, 2023 से लक्षद्वीप सागर में लगातार समुद्री हीटवेव की स्थिति बनी हुई है. समुद्र का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहने के कारण बड़ी संख्या में कोरल प्रभावित हुए हैं.
हजारों समुद्री जीवों का घर

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कोरल रीफ्स समुद्री जैव विविधता की रीढ़ माने जाते हैं. दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत समुद्री प्रजातियां किसी न किसी रूप में कोरल रीफ्स पर निर्भर रहती हैं. इनके तबाह होने से पूरे समुद्री खाद्य तंत्र पर असर पड़ सकता है.
मछुआरों की आजीविका पर संकट

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लक्षद्वीप की बड़ी आबादी मत्स्य पालन पर निर्भर है. कोरल रीफ्स मछलियों के प्रजनन और संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र हैं. इनके खत्म होने से मछलियों की संख्या घट सकती है, जिससे स्थानीय लोगों की इनकम प्रभावित होगी.
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