Monsoon Late Reason: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार थम सी गई है. करीब 15 दिनों पहले तक ऐसा लग रहा था कि जल्द ही देश के ज्यादातर हिस्सों में तेज बारिश देखने को मिलेगी लेकिन ताजा हालातों ने लोगों को मायूस ही किया है. आईएमडी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देरी के कारणों पर रोशनी डाली है.
13 दिन में 19 राज्यों तक पहुंचा मानसून

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4 जून को केरलम में दस्तक देने के बाद मानसून 13 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है. मानसून 8 जून से तेलंगाना के भद्राचलम में अटका हुआ है. यह यूपी में 18 से 20 जून, मध्य प्रदेश में 15-16 जून और राजस्थान में 20 जून तक पहुंच जाता था, लेकिन इस बार इन सभी राज्यों में 22 जून के बाद ही एंट्री लेगा. लगातार तीसरे साल जून में मानसून ने लंबा ब्रेक लिया है. मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 4-5 दिनों में मानसून आगे बढ़ सकता है. ऐसे में मानसून में कुल 13 से 15 दिन का ब्रेक हो सकता है. हालांकि, 2024 और 2025 में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी लेकिन इस साल 17 जून तक देश में सामान्य से 37.8% कम बारिश हुई है.
अल नीनो के हालात भी बन रहे

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अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOA) ने उपग्रह के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की है. इसके अनुसार इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन पर्याप्त गति से सक्रिय नहीं हो पाया है, इससे मानसून की रफ्तार धीमी है. अल नीनो की परिस्थितियां भी बन रही हैं. इससे लंबे समय तक सूखा और असमान बारिश देखने को मिल सकती है. मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी भारत में बादलों का घनापन कम है.
20 जून के आसपास तेज चलेंगी हवाएं

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इस साल मानसून की प्रक्रिया अपनी पूरी क्षमता से नहीं चल पाई है. मजबूत सोमाली जेट के अभाव में भारत में नमी का प्रवाह काफी सीमित रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश की कमी हुई है. अब पूर्वानुमान मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 20 जून के आसपास जेट हवाएं काफी मजबूत हो सकती हैं. जैसे-जैसे अरब सागर के ऊपर हवाएं तेज होंगी, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और पश्चिमी भारत के अन्य हिस्सों में नमी का प्रवाह तेजी से बढ़ने की उम्मीद है.
जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न

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मौसम विभाग के मुताबिक, जेट स्ट्रीम का मौजूदा पैटर्न कमजोर होने पर मानसूनी हवाएं तेज होंगी. अगले 4-5 दिनों में मानसून के महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं. जेट स्ट्रीम वायुमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली बहुत तेज हवाएं हैं. ये आमतौर पर पृथ्वी की सतह से करीब 8 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर होती है. ये मानसूनी बादलों और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ को प्रभावित करती हैं.
वैज्ञानिक भी हो उठे चिंतित

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मानसून के आगे बढ़ने में सबसे बड़ी रुकावटों में से एक भारतीय उपमहाद्वीप में लगातार सूखी हवा का आना है. कई राज्य मानसूनकी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में बारिश की कमी को लेकर चिंता भी बढ़ रही है. मानसूनके इस लंबे ठहराव ने किसानों के साथ-साथ जल प्रबंधन से जुड़े लोगों और मौसम वैज्ञानिकों, की चिंता बढ़ा दी है. देश के बड़े हिस्सों में गर्मी का असर बना है, जबकि मानसूनको उपमहाद्वीप के अंदर तक ले जाने वाली वायुमंडलीय स्थितियां कमजोर बनी हुई हैं.
पटरी पर लौट रहे हैं हालात

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मौसम के जानकारों का कहना है कि हालात बदल सकते हैं. मानसूनके जोरदार तरीके से आगे बढ़ने के लिए जरूरी कई अहम चीजें अब सही जगह पर आ रही हैं. भारत के पश्चिमी तट पर धीरे-धीरे नमी लौट रही है, जिससे बारिश लाने वाले बादलों के बनने के लिए बेहतर माहौल बन रहा है. अगर मौसम से जुड़े ये कारक अनुमान के मुताबिक मजबूत होते हैं तो आने वाले दिनों में मानसून तेजी से भारत में उत्तर और पश्चिम की ओर बढ़ सकता है.