Bihar Cabinet Expansion: बिहार कैबिनेट का होगा विस्तार, संभावित फॉर्मूले का खुलासा, नीतीश के बेटे निशांत पर भी बड़ा फैसला
बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपनी कैबिनेट का विस्तार करने की तैयारी में जुटे हैं। 15 अप्रैल को उन्होंने 2 उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रताप सिंह के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब वे अपने मंत्रिमंडल को बढ़ाएंगे और उसमें मंत्रियों को जोड़कर आगे की रणनीति बनाएंगे।

सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का विस्तार मई के पहले हफ्ते में हो सकता है। 4 मई से 10 मई के बीच मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। बिहार की सरकार में कुल 36 मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। चर्चा हे कि सम्राट चौधरी गठबंधन के सभी दलों BJP, JDU, चिराग पासवान की LJP-R, जीतनराम की HUM, उपेंद्र कुशवाहा की RLM को भी मंत्री पद देंगे।
ऐसे बांटे जाएंगे 36 मंत्रीपद
2 / 5बिहार के सियासी सूत्रों के अनुसार, 36 पदों में से 16-16 मंत्रीपद भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार की JDU को मिल सकते हैं। 2 मंत्री पद चिराग पासवान की पार्टी को मिल सकते हैं। वहीं एक-एक पद जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को दिए जाने की योजना है। विशेष उल्लेखनीय है कि यह अभी बिहार मंत्रिमंडल विस्तार का संभावित फॉर्मूला है।
निशांत कुमार नहीं बनेंगे मंत्री
3 / 5नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने फिलहाल सरकार में कोई जिम्मेदारी नहीं लेने का फैसला किया है। उपमुख्यमंत्री न बनने का फैसला भी उन्हीं का था। पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में शामिल न होने का फैसला भी उन्हीं का है। क्योंकि वे खुद को कोई सरकारी पद संभालने योग्य बनाना चाहते हैं। इसके लिए वे 3 मई से बिहार की यात्रा पर निकलेंगे और पश्चिमी चंपारण से यात्रा शुरू होगी।
निशांत कुमार MLA बन सकते
4 / 5JDU सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार को विधान परिषद का सदस्य बनाया जा सकता है। इसका फैसला भी जून महीने में होगा। निशांत कुमार जून महीने में विधान परिषद के सदस्य पद की शपथ ग्रहण करेंगे। इसके बाद तय होगा कि वह सरकार में भूमिका निभाएंगे या संगठन का हिस्सा बनेंगे। नीतीश कुमार के बाद निशांत ही JDU की पहचान और भविष्य हैं तो उनकी भूमिका अहम होगी।
निशांत कुमार की बिहार यात्रा
5 / 5निशांत कुमार की बिहार यात्रा 3-4 महीने जारी रहेगी। वे पूरे राज्य में संगठन की स्थिति का अनुभव लेना चाहते हैं। वे बिहार की यात्रा किसी बड़े पदाधिकारी के तौर पर नहीं करेंगे, बल्कि साधारण JDU कार्यकर्ता की तरह करेंगे। इस दौरान जहां-जहां वे जाएंगे, पार्टी के बड़े नेता उनके साथ जुड़ते जाएंगे। उनका मकसद पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क स्थापित करना है।



















