किसी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा अक्सर देश की एक अहम राजनीतिक घटना बन जाता है, खासकर तब जब ये किसी बड़े संकट या प्रशासनिक नाकामी के बाद हो. पिछले कुछ दशकों में, कई वरिष्ठ नेताओं ने नैतिक या राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया है, भले ही उन पर निजी तौर कोई गलत काम करने का आरोप न हो. यहां भारत के राजनीतिक इतिहास के कुछ सबसे खास मिसाल दी गई है. (Photo-X)
लाल बहादुर शास्त्री

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लाल बहादुर शास्त्री जवाहरलाल नेहरू सरकार में भारत के रेल और परिवहन मंत्री थे. 23 नवंबर 1956 को तमिलनाडु में अरियालुर ट्रेन हादसे के बाद, जिसमें एक रेलवे पुल के ढहने से तकरीबन 140-150 लोगों की जान चली गई थी, शास्त्री ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दे दिया. हालांकि, इससे पहले भी एक अन्य रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने उन्हें पद पर बने रहने के लिए मना लिया था. लेकिन अरियालुर एक्सिडेंट के बाद उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया. (AI Image)
टीटी कृष्णमाचारी

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वित्त मंत्री के तौर पर टीटी कृष्णमाचारी ने मुंध्रा वित्तीय घोटाले के बाद इस्तीफा दे दिया. इस मामले में LIC ने बिजनेसमैन हरिदास मुंध्रा से जुड़ी कंपनियों में तकरीबन 1.26 करोड़ रुपये का निवेश किया था. संसद में कांग्रेस सांसद फिरोज गांधी ने ये मुद्दा उठाया था. हालांकि कृष्णमाचारी पर भ्रष्टाचार का कोई निजी आरोप नहीं था, फिर भी उन्होंने प्रशासनिक चूक की जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया. (Photo-X)
वीके कृष्ण मेनन

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साल 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत की हार के बाद वीके कृष्ण मेनन ने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. भारतीय सेना की तैयारियों में कमी की काफी आलोचना हुई और बढ़ते राजनीतिक दबाव के कारण आखिरकार अक्टूबर 1962 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. (Photo-X)
नीतीश कुमार

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प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लीडरशिप वाली NDA सरकार में रेल मंत्री के तौर पर काम करते हुए, नीतीश कुमार ने पश्चिम बंगाल में 1999 की गाइसल स्टेशन में 2 ट्रेनों की टक्कर के बाद इस्तीफा दे दिया, जिसमें तकरीबन 280 लोगों की जान चली गई थी. जांच में सिग्नलिंग और ऑपरेशनल नाकामियां सामने आने के बावजूद उन्होंने इस हादसे की नैतिक जिम्मेदारी ली थी. (Photo-X)
शिवराज पाटिल

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केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के बाद इस्तीफा दे दिया. इन हमलों ने खुफिया तालमेल, तटीय सुरक्षा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स में कमियों को सामने लाया, जिसके चलते सरकार की सुरक्षा तैयारियों को लेकर हुई आलोचना के बीच पाटिल को पद छोड़ना पड़ा. (Photo-ANI)
इस्तीफे की पेशकश जिन्हें मंजूरी नहीं मिली

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2 और केंद्रीय रेल मंत्रियों ने भी इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन इस्तीफा मंजूर न होने पर वे अपने पद पर बने रहे. 2001 में कई ट्रेन हादसों के बाद ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने की पेशकश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे पद पर बने रहने को कहा. इसी तरह, 2017 में कई ट्रेनों के पटरी से उतरने की घटनाओं के बाद सुरेश प्रभु ने इस्तीफा देने की पेशकश की थी. लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने औपचारिक रूप से इस्तीफा मंजूर नहीं किया, हालांकि बाद में कैबिनेट में फेरबदल के दौरान पीयूष गोयल को सुरेश प्रभु की जगह नियुक्त किया गया. (Photo-ANI)