केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान देश के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल हैं. लेकिन NEET विवाद के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में है. ओडिशा में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान ने छात्र राजनीति से शुरुआत की और केंद्र सरकार में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन बढ़ते धरने-प्रदर्शन के कारण उन्होंने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
कहां से शुरू की पढ़ाई

2 / 8
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ था. उनकी शुरुआती शिक्षा भी ओडिशा में ही पूरी हुई, कहा जाता है कि, पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि सामाजिक मुद्दों और राजनीति की तरफ बढ़ने लगी, जिसने आगे चलकर उनका करियर बड़े नेताओं में शामिल किया .
कहां से की ग्रेजएशन और मास्ट्रर

3 / 8
जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान ने तालचेर कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए उत्कल यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. यहां से उन्होंने 'एंथ्रोपोलॉजी' यानी मानवशास्त्र विषय में मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री हासिल की.
छात्र राजनीति से शुरू हुआ देश में बड़े मंत्री पद तक का सफर

4 / 8
कॉलेज और यूनिवर्सिटी के दिनों में ही धर्मेंद्र प्रधान छात्र राजनीति से जुड़ गए थे. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ काम करते हुए छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाया और एक उभरते हुए चेहरे के रूप में बढ़ते रहे.
भाजयुमो में मिली बड़ी थी जिम्मेदारी

5 / 8
छात्र राजनीति के बाद धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से जुड़े. संगठन में बेहतर काम करने के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं. बाद में वह भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाए गए.
विधानसभा से लोकसभा तक

6 / 8
धर्मेंद्र प्रधान ने साल 2000 में पहली बार ओडिशा विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में बड़ी शुरुआत की. इसके बाद साल 2004 में वह लोकसभा सांसद बने, फिर क्या आगे चलकर उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में भी अपनी भूमिका निभाई.
कई मंत्रालयों की संभाली जिम्मेदारी

7 / 8
केंद्र सरकार में धर्मेंद्र प्रधान ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला है. वह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, इस्पात मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री जैसे पदों पर भी रह चुके हैं.
2021 में मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी

8 / 8
जुलाई 2021 में धर्मेंद्र प्रधान को भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके बाद से वह देश की शिक्षा व्यवस्था, नई शिक्षा नीति और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम कर रहे हैं. हालांकि, लगातार पेपर लीक और छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटना ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर उनका पकड़ कमजोर कर दी, जिसका नतीजा ये हुआ कि उनको अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
यह भी पढ़ें:-छात्र कार्यकर्ता से केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक… ऐसा रहा धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर