चिकन प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है और दुनिया की बड़ी आबादी इसका खूब सेवन करती है. लेकिन हालिया वैज्ञानिक रिसर्च में चिकन से जुड़े एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे की ओर ध्यान खींचा है, जिसकी जानकारी होना आपके लिए काफी जरूरी है.
चिकन में किस बैक्टीरिया का डर?

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों की संख्या काफी बढ़ रही है, ऐसे में कई बैक्टीरिया का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. इन्हीं मे शामिल है कैम्पिलोबैक्टर नाम का एक बैक्टीरिया तेजी से फैल रहा है.
क्या है कैम्पिलोबैक्टर क्यों बढ़ा रहा चिंता?

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कैम्पिलोबैक्टर दुनिया में डायरिया यानी दस्त की बीमारी फैलाने वाले सबसे आम बैक्टीरिया में से एक माना जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि बड़े स्तर पर होने वाली मुर्गी पालन प्रक्रिया में इस बैक्टीरिया के पनपने की संभावना बढ़ रही है, जिससे इंसानों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है.
वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

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रिसर्च में बताया गया कि मुग्रियों की संख्या बढ़ने और बड़े पैमाने पर पोल्ट्री फार्म होने के कारण इस बैक्टीरिया का खतरा लगातार बना हुआ है और यह धीरे-धीरे इंसानों तक पहुंचकर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां पैदा कर सकता है.
कब बढ़ जाता है संक्रमण का खतरा?

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जानकारी के अनुसार, अगर चिकन पुरी तरह पका नो हो और उसमें मौजूद बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, तो इसका खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा अधपके या कच्चे चिकन के सेवन से भी कैम्पिलोबैक्टर संक्रमण का खतरा बना रहता है, इसलिए जरूरी है कि इसे ठीक से पकाएं.
कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया से कौन-कौन सी समस्या हो सकती है?

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ऐसे चिकन के जरिए अगर किसी व्यक्ति के अंदर कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया प्रवेश कर जाता है, तो उसे डायरिया (दस्त) पेट दर्द और आंतों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. कुछ मामलों में यह इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ा सकता है. गंभीर स्थिति में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
इस कारण भविष्य में इलाज हो सकता है मुश्किल

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वैज्ञानिकों ने यह भी चिंता जताई है कि कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक ठीक से असर नहीं कर रही है. इसका मतलब है कि भविष्य में इस संक्रमण के इलाज में मुश्किलें आ सकती हैं. कई दवाएं इस बैक्टीरिया पर पहले की तरह प्रभावी नहीं रह सकती हैं.