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आज कल ज्यादातर स्मार्टफोन 33W, 45W, 67W, 80W, 100W या इससे ज्यादा पावर वाली फास्ट चार्जिंग के साथ आते हैं. कंपनियां दावा करती हैं कि फोन कुछ ही मिनटों में काफी हद तक चार्ज हो जाता है, लेकिन क्या ऐसा करना सही है.
क्या Fast Charging वाकई नुकसान पहुंचाती है?

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आज के स्मार्टफोन में एडवांस Battery Management System (BMS), टेंपरेचर सेंसर और स्मार्ट चार्जिंग एल्गोरिद्म दिए जाते हैं. ये तकनीक चार्जिंग की स्पीड को अपने आप कंट्रोल करती है. इसी वजह से फोन शुरुआत में तेजी से चार्ज होता है लेकिन 70% से 80% के बाद स्पीड कम हो जाती है ताकि बैटरी पर ज्यादा प्रेशर न पड़े.
ये गलतियां बैटरी की लाइफ कम कर सकती हैं

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बैटरी जल्दी खराब होने के पीछे कई आम गलतियां जिम्मेदार होती हैं. जैसे चार्जिंग के समय गेम खेलना या भारी ऐप्स चालान, लोकल या नकली चार्जर का इस्तेमाल करना फोन को धूप या बहुत गर्म जगह पर चार्ज करना, बैटरी को बार-बार 0 परसेंट तक खत्म करना और लंबे समय तक 100% चार्ज होने के बाद भी चार्जर से लगाए रखना.
Battery Protection फीचर को नजरअंदाज न करें

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आजकर कई स्मार्टफन में Optimized Charging या Battery Protection जैसे फीचर्स दिए जाते हैं. ये फीचर्स बैटरी को जरूरत से ज्यादा चार्ज होने और लंबे समय तक हाई टेंपरेचर में रहने से बचाते हैं. आगर आपके फोन में ये ऑप्शन मौजूद है, तो इसे हमेशा ऑन रखें.
Fast Charging इस्तेमाल करें या नहीं?

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अगर आप कंपनी का सर्टिफाइड चार्जर इस्तेमा कर रहे हैं और फोन नॉर्मल टेपरेचर में चार्ज हो रहा है, तो फास्ट चार्जिंग पूरी तरह सेफ मानी जाती है. स्लो चार्जिंग से बैटरी पर थोड़ा कम दबाव पड़ सकता है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि फास्ट चार्जिंग बैटरी को नुकसान पहुंचाती है. (Images Credit- Magnific)