गर्मी बढ़ते ही AC की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में नया AC खरीदने वाले लोगों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि क्या AC के साथ स्टेबलाइजर लगाना जरूरी है या बिना स्टेबलाइजर भी काम चल सकता है. इसका जवाब आपके इलाके की बिजली सप्लाई पर निर्भर करता है.
बिजली की स्थिति तय करती है जरूरत

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अगर आपके क्षेत्र में बार-बार बिजली कटती है या वोल्टेज अचानक कम-ज्यादा होता रहता है, तो AC के लिए स्टेबलाइजर लगाना फायदेमंद हो सकता है. लगातार वोल्टेज फ्लक्चुएशन AC के पार्ट्स पर असर डाल सकता है, इसलिए ऐसे इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा जरूरी मानी जाती है.
नॉन-इन्वर्टर AC के साथ स्टेबलाइजर जरूरी

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यदि आप नॉन-इन्वर्टर AC इस्तेमाल करते हैं, तो उसके साथ स्टेबलाइजर लगाना बेहतर माना जाता है. इन मॉडल्स में वोल्टेज को नियंत्रित करने की कोई विशेष इनबिल्ट सुविधा नहीं होती, इसलिए बाहरी स्टेबलाइजर सुरक्षा का काम करता है.
इनबिल्ट स्टेबलाइजर देता है सुरक्षा

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अधिकांश इन्वर्टर AC में बिल्ट-इन स्टेबलाइजर या वोल्टेज प्रोटेक्शन फीचर मिलता है. यही वजह है कि ये AC लगभग 160V से 290V तक की वोल्टेज रेंज को आसानी से झेल सकते हैं. वहीं नॉन-इन्वर्टर AC में यह सुविधा नहीं होती, इसलिए उनके साथ स्टेबलाइजर लगाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.