IND vs WI: भारत की वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज खत्म हो गई है. टीम इंडिया ने 2-1 से सीरीज अपने नाम की. तीनों मैचों में खूब रन बने. रिकॉर्ड दस शतक लगे. भारत ने पहले दो वनडे में लक्ष्य का पीछा करते हुए शानदार बल्लेबाजी की और मैच जीते. दूसरे वनडे में तो भारत ने 405 रन का स्कोर चेज कर दिया था. शुभमन गिल ने नाबाद 223 रनों की पारी खेली. तीसरे वनडे में भारत ने पहले खेलते हुए 351 रन बनाए. वेस्टइंडीज की टीम ने 48.2 ओवर में 352 रन बनाकर मैच जीत लिया. टीम इंडिया ने सीरीज तो जीत ली है लेकिन अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. अगले साल वनडे वर्ल्ड कप होना है. इसका शेड्यूल भी आ गया है. ऐसे में भारत को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. आइए आपको बताते हैं कि भारत की तीन कमजोरियां कौन सी देखने को मिलीं.
गेंदबाजों ने किया निराश
वनडे सीरीज में भारत के गेंदबाजों ने निराश किया. स्पिनर्स भी इस बार कमाल नहीं दिखा पाए. विंडीज ने पहले वनडे में 295, दूसरे वनडे में 405 और तीसरे वनडे में 352 रन बनाए. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि विंडीज के बल्लेबाजों को भारतीय गेंदबाजों ने परेशान नहीं किया. वेस्टइंडीज ने लगातार रन बनाए. पहले दो वनडे मैचों में बल्लेबाजों के दम पर गेंदबाजी ढक गई. तीसरे वनडे में पुरी तरह पोल खुल गई.
डेथ बॉलिंग पर तो खुद शुभमन गिल ने सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि हमें ये नहीं पता है कि आक्रमण कर रहे हैं या डिफेंस. गिल ने साफ कहा कि ये बहुत बड़ी चिंता का विषय है. पूरी सीरीज में गेंदबाजी भारत की कमजोर कड़ी रही. अगर आगे भी ऐसा ही हाल रहा तो फिर 2027 वनडे वर्ल्ड कप जीतना मुश्किल हो जाएगा.
खिलाड़ियों की फील्डिंग रही खराब
भारतीय टीम तगड़ी फील्डिंग के लिए जानी जाती है. टीम में युवा खिलाड़ी हैं जो कई रन बचा जाते हैं. विराट कोहली जैसे दिग्गज हैं जिनके सामने बल्लेबाजों की रन लेने की हिम्मत नहीं होती है. वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में फील्डिंग भी काफी कमजोर रही. तीसरे वनडे में तो और भी बुरा हाल देखने को मिला. भारत ने 6-7 कैच छोड़े.
शुभमन गिल ने भी इसे स्वीकार किया कि उनकी फील्डिग खराब रही. शाई होप ने तीसरे वनडे में नाबाद 162 रन बनाए. उनके भी कैच छूटे. एक कैच छूटने से पूरे मैच का रुख बदल जाता है. टीम इंडिया को इस पर काम करने की जरूरत है. अगले साल वनडे वर्ल्ड कप में बड़ी टीमों के सामने ये गलती बहुत भारी पड़ सकती है.
गेंदबाजी आक्रमण
तेज गेंदबाजी टीम इंडिया के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. गुरनूर बरार, अंसुल कंबोज और आकिब नबी बिल्कुल भी प्रभावित नहीं कर पाए. इनके पास खुद को साबित करने का बहुत बड़ा मौका था. तिरुवनंतपुरम के पहले वनडे में बरार ने 60 रन दिए थे थे. इसके बाद गुवाहाटी के दूसरे वनडे में उन्होंने 96 रन लुटाए. कंबोज ने तीसरे वनडे में 82 रन दिए. अब ऐसे गेंदबाजी आक्रमण से मैच जीतना बहुत मुश्किल है.
किसी गेंदबाज में भी निरंतरता नहीं देखने को मिली. अनुभवी रवींद्र जडेजा भी फेल रहे. उन्हें भी विंडीज के बल्लेबाज आसानी से खेल गए. जडेजा ने दो मैचों में 129 रन दिए. उनके अलावा भी अन्य स्पिनर्स का दबदबा देखने को नहीं मिला. मैनेजमेंट को अगले साल वर्ल्ड कप को देखते हुए मोहम्मद शमी और भुवनेश्वर कुमार जैसे गेंदबाजों को टीम में लाना चाहिए. भारतीय टीम तभी डेथ ओवर में भी कमाल कर सकती है.