किचन में रखे बर्तनों का अगर सबसे ज्यादा अगर किसी का किया जाता है तो वो प्रेशर कुकर है. इसमें दाल, सब्जियां या फिर मीट बहुत ही आसानी से पक जाता है और वक्त भी कम लगता है. अगर इन्हीं चीजों को कड़ाही में पकाया जाए तो वक्त बहुत ही लगता है. ऐसा क्यों होता है और क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पकने के पीछे कौन-सा विज्ञान काम करता है? बहुत कम लोग जानते होंगे कि इसके पीछे का साइंस सिर्फ और सिर्फ प्रेशर है जो खाना पकाते वक्त बनता है. हालांकि, इससे जुड़ी ये बातें आपको जरूर पता होना चाहिए. आइए इस लेख में विस्तार से इसके पीछे का लॉजिक जानते हैं.
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प्रेशर कुकर के अंदर क्या होता है?
जब प्रेशर कुकर में पानी और खाना डालकर उसे गर्म किया जाता है तो पानी भाप में बदलने लगता है.वहीं, नॉर्मल बर्तन में यह भाप आसानी से बाहर निकल जाती है, लेकिन प्रेशर कुकर का ढक्कन बंद होने की वजह यही हवा अंदर रहती है. जैसे-जैसे भाप बढ़ती है, कुकर के अंदर का दबाव बढ़ने लगता है. इससे प्रेशर बनता है और खाना बहुत ही जल्दी पकने लगता है.
कैसे बढ़ता है बोइलिंग पॉइंट?
प्रेशर कुकर के अंदर का प्रेशर सिर्फ और सिर्फ पानी से बढ़ता है. बताया जाता है कि नॉर्मल वायुमंडलीय का प्रेशर 100 डिग्री सेल्सियस होता है. तभी पानी उबल सकता है, लेकिन जब प्रेशर कुकर के अंदर दबाव बढ़ता है तो पानी का बोइलिंग पॉइंट भी बढ़ जाता है. इससे कुकर के अंदर का मौसम ज्यादा गर्म हो जाता है और खाना जल्दी पकने लगता है.
खाना जल्दी कैसे पकता है?
दाल, चावल, आलू और दूसरी चीजों को पकने के लिए तेज टेंपरेचर की जरूरत होती है. प्रेशर कुकर में बढ़ा हुआ प्रेशर पानी और भाप बनाने का काम करता है, जिससे जल्दी गर्म हो जाता है और पकने लगता है. पानी सूखता रहता है, भाप बनती रहती है, सीटी आती रहती है और खाना पकता रहता है.
सीटी क्यों बजती है?
कुकर की सीटी या प्रेशर रेगुलेटर का काम अंदर के प्रेशर को कंट्रोल करता है. जब अंदर का प्रेशर एक लिमिट तक पहुंच जाता है तो सीटी बज जाती है और प्रेशर बाहर निकलने लगता है. ऐसे ही यह सिलसिला चलता रहता है और एक वक्त के बाद खाना पूरी तरह से तैयार हो जाता है.
प्रेशर कुकर इस्तेमाल करने के फायदे
कुकर में काम करने के कई फायदे शेफ को मिल सकते हैं. पहला तो यह कि इसमें खाना बहुत ही जल्दी पकता है और गैस की बचत होती है. दूसरा यह कि खाने का टेक्सचर बहुत ही अच्छा रहता है, बस आपको सीटी और पानी के बीच का सही अंदाजा होना चाहिए.
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