Parenting में ज्यादा ढील पड़ सकती है भारी! जानिए परमिसिव पेरेंटिंग के फायदे और नुकसान

Is Permissive Parenting Bad: अब बच्चों को पालने के लिए नए-नए तरीके आने लगे हैं, जिसमें परमिसिव पेरेंटिंग भी शामिल है. इस दौरान माता-पिता बच्चों पर सख्त नियम नहीं थोपते और उनकी हर डिमांड पूरी करते हैं, लेकिन इसका असर बच्चों पर कितना पड़ रहा है. आइए इस लेख में जानते हैं. 

Permissive Parenting Kya Hoti Hai

क्या है परमिसिव पेरेंटिंग? Image Credit- Freepik

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Permissive Parenting Kya Hoti Hai: आजकल पेरेंटिंग के तरीके काफी तेजी से बदल रहे हैं. एक वक्त ऐसा भी रहा है जब बच्चों पर बहुत सख्ती की जाती थी. लड़कियों को बाहर नहीं निकलने दिया जाता था और पढ़ाया नहीं जाता है. लड़कों को ज्यादा महत्व दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब बच्चों को पालने के तौर-तरीके काफी बदल रहे हैं. अब कई माता-पिता बच्चों को पूरी आजादी देने पर विश्वास करते हैं. उनकी हर डिमांड पूरी करते हैं, लेकिन इसको लेकर कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसा करने से बच्चे जिद्दी हो जाते हैं जो ठीक नहीं माना जाता. पहली नजर में यह तरीका बच्चों के लिए अच्छा लग सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ढील कई बार उनके व्यवहार और भविष्य पर असर डाल सकती है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी स्टाइल को परमिसिव पेरेंटिंग कहा जाता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं परमिसिव पेरेंटिंग क्या है और इसके फायदे और नुकसान क्या हो सकते हैं. 

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क्या है परमिसिव पेरेंटिंग?

परमिसिव पेरेंटिंग में पेरेंट्स बच्चों पर ज्यादा सख्ती नहीं करते हैं. उनके ऊपर नियम या कायदे लागू नहीं करते. अपने बच्चों को खुलकर फैसले लेने देते हैं और उनकी हर बात मानने की कोशिश करते हैं. इसमें प्यार और दोस्ती तो होती है, लेकिन अनुशासन की कमी देखी जाती है.

परमिसिव पेरेंटिंग के फायदे    

  • पेरेंट्स से मजबूत रिश्ता बनना 
  • क्रिएटिविटी को बढ़ावा मिलना 
  • आपसी मोहब्बत पैदा होना 
  • भरोसा कायम हो जाना 

परमिसिव पेरेंटिंग के नुकसान 

  • जिम्मेदारी की कमी
  • ढील का नाजायज फायदा 
  • जिद्दी बन जाना 
  • गलत फैसले की संभावना बढ़ना 

कैसे पहचानें कि आप परमिसिव पेरेंट हैं या नहीं?

  • बच्चों को खुलकर जीने देना
  • उनके लिए कोई कठोर नियम ना होना
  • उनकी गलतियों को समझाने या डांटने के बजाय नजरअंदाज करना
  • रोने पर हर जिद पूरी करना 

कैसे रखें सही बैलेंस?

  • बच्चों को पूरी आजादी देने के बजाय कुछ बेसिक नियम जरूर बनाएं.
  • बार बार बच्चे की बात मान लेना सही नहीं है. कभी-कभी उन्हें डांटना भी जरूरी है.
  • बच्चों को यह समझाएं कि उन्हें किस तरह बात करनी चाहिए. इससे वे सही-गलत का फर्क सीखते हैं.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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