हिमाचल में फिर से मिलेगा सबसे लंबी टॉय ट्रेन का मजा! 40 रुपये में 164 KM का खूबसूरत सफर; जानिए कैसे घूम सकते हैं आप

1929 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान शुरू हुई यह लाइन कांगड़ा के प्रसिद्ध मंदिर शहरों बैजनाथ और ज्वालामुखी को भी आपस में जोड़ती है.

Himachal toy train

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ों और वादियों की सैर करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक बेहद सुखद और बड़ी खबर सामने आई है. निचले हिमालय के सबसे सुरम्य रेल मार्गों में से एक ‘कांगड़ा वैली रेलवे’ पर आखिरकार टॉय ट्रेन फिर से शुरू हो गई है. ब्रिटिश काल की यह ऐतिहासिक नैरो-गेज लाइन, जो पंजाब के पठानकोट को हिमाचल के जोगिंदरनगर से जोड़ती है, लगभग 4 साल के लंबे इंतजार के बाद पटरी पर लौट आई है.

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साल 2022 में आए भीषण मानसून के दौरान चक्की नदी पर बने रेलवे पुल के बह जाने से यह रूट पूरी तरह ठप हो गया था, जिससे अब जाकर यात्रियों को बड़ी राहत मिली है. 164 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक हिमाचल प्रदेश का सबसे लंबा टॉय ट्रेन रूट है.

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टॉय ट्रेन सिर्फ ₹40 में!

इस टॉय ट्रेन सेवा के शुरू होने का सबसे ज्यादा उत्साह कांगड़ा, नूरपुर, पालमपुर और ज्वालामुखी जैसे कस्बों में देखा जा रहा है. स्थानीय लोगों के लिए यह ट्रेन सिर्फ घूमने का जरिया नहीं, बल्कि रोजमर्रा के सफर का सबसे किफायती सहारा है.

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जहां पठानकोट से जोगिंदरनगर तक का बस का किराया करीब 392 रुपये होता है, वहीं इस टॉय ट्रेन का टिकट महज 40 रुपये प्रति यात्री है. इतना सस्ता और आरामदायक सफर होने की वजह से यह रूट डेली कम्यूटर्स और बजट में घूमने वाले बैकपैकर्स के लिए लाइफलाइन साबित होगा.

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अनुराग ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

2022 की मानसूनी तबाही और चक्की नदी के तेज बहाव से टूटे रेलवे पुल की पूरी तरह मरम्मत होने के बाद, हमीरपुर के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ राज्यसभा सांसद राजीव भारद्वाज ने कांगड़ा रेलवे स्टेशन से इस सेवा को हरी झंडी दिखाकर औपचारिक शुरुआत की.

पहले दिन पठानकोट सिटी नैरो गेज स्टेशन से सुबह दो ट्रेनें रवाना की गईं, जबकि हिमाचल की तरफ से सुबह 8:30 बजे कांगड़ा स्टेशन से ट्रेन को रवाना कर कनेक्टिविटी बहाल की गई.

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खूबसूरत है ये रूट

शिमला रूट की खड़ी चढ़ाइयों और ढेरों सुरंगों के विपरीत, कांगड़ा टॉय ट्रेन सीधे मैदानों, हरी-भरी घाटियों और पहाड़ों की तलहटी से होकर गुजरती है. यह ऐतिहासिक लाइन अपने सफर में 900 से अधिक छोटे-बड़े पुलों को पार करती है, लेकिन इसमें सुरंगें न के बराबर हैं. यही वजह है कि यात्रियों को खिड़की से ब्यास नदी पर बने पोंग बांध, दूर तक फैले चाय के बागान, छोटे पहाड़ी गांव और बैकग्राउंड में दिखने वाली बर्फ से ढकी धौलाधार पर्वत माला और मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं.

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1929 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान शुरू हुई यह लाइन कांगड़ा के प्रसिद्ध मंदिर शहरों बैजनाथ और ज्वालामुखी को भी आपस में जोड़ती है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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