---विज्ञापन---

दुनिया angle-right

7 दिन का सफर, 8 टाइम जोन और 2 महाद्वीप… यह है दुनिया की सबसे लंबी रेल यात्रा, जानें क्यों है इतनी खास!

इस ऐतिहासिक सफर की विशालता का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं कि यह ट्रेन कुल 9,289 किलोमीटर का सफर तय करती है.

---खबर नीचे जारी है---

अगर आपको लगता है कि 5 या 10 घंटे का ट्रेन सफर लंबा होता है, तो जरा कल्पना कीजिए कि आपको लगातार एक हफ्ते तक एक ही ट्रेन में रहना पड़े. दुनिया में एक ऐसा रेल मार्ग है जो आपको यह अनोखा और जादुई अनुभव देता है. हम बात कर रहे हैं रूस के ‘ट्रांस-साइबेरियन रेलवे’ की, जिसे दुनिया का सबसे लंबा सिंगल रेलवे सिस्टम माना जाता है. पश्चिम में रूस की राजधानी मॉस्को से शुरू होकर सुदूर पूर्व में व्लादिवोस्तोक तक जाने वाली यह रेल लाइन दुनिया भर के मुसाफिरों के लिए किसी सपने जैसी है.

जादुई सफर

इस ऐतिहासिक सफर की विशालता का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं कि यह ट्रेन कुल 9,289 किलोमीटर का सफर तय करती है. मॉस्को से व्लादिवोस्तोक तक की पूरी यात्रा करने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लगता है. रूस क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जहां 11 टाइम जोन हैं. यह ट्रेन अपनी यात्रा के दौरान 8 अलग-अलग टाइम ज़ोन को पार करती है. यानी हर दिन आपके लिए सूरज उगने और ढलने का समय बदल जाता है. सफर के दौरान यह ट्रेन 80 से अधिक छोटे-बड़े शहरों और कस्बों से होकर गुजरती है.

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें : केरल के इस रूट पर हाई स्पीड ट्रेन दौड़ाने का प्लान, एक दिन में 2 लाख से ज्यादा लोग करेंगे सफर!

130 साल से ज्यादा पुराना इतिहास

यह सिर्फ एक रेलवे लाइन नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन इंजीनियरिंग अजूबों में से एक है. इसका निर्माण आधिकारिक तौर पर 1891 में जार अलेक्जेंडर III के शासनकाल के दौरान शुरू हुआ था. उस समय साइबेरिया के कई हिस्से पूरी तरह अलग-थलग थे और देश के एक कोने से दूसरे कोने तक माल या इंसानों को पहुंचाने में महीनों लग जाते थे. हजारों मजदूरों ने हाड़ कंपा देने वाली ठंड, जंगलों और पहाड़ों के बीच 20 से अधिक साल लगाकर इसे तैयार किया और 1916 में यह मुख्य लाइन पूरी तरह बनकर तैयार हुई.

---खबर नीचे जारी है---

बदल जाते हैं दो महाद्वीप

इस यात्रा की सबसे अनोखी बात यह है कि यह बिना ट्रेन बदले आपको यूरोप से एशिया महाद्वीप में ले जाती है. सफर की शुरुआत मॉस्को की ऐतिहासिक सड़कों से होती है, जिसके बाद ट्रेन यूराल पर्वतों को पार करती है – जिन्हें यूरोप और एशिया की प्राकृतिक सीमा माना जाता है.

इसके बाद खिड़की के बाहर का नजारा हर दिन बदलता है. आपको साइबेरिया के घने जंगल, विशाल नदियां और खूबसूरत शांत गांव दिखाई देते हैं. इस यात्रा का सबसे खूबसूरत मोड़ तब आता है जब ट्रेन बैकाल झील के करीब से गुजरती है. यूनेस्को की यह विश्व धरोहर साइट दुनिया की सबसे गहरी मीठे पानी की झील है.

---खबर नीचे जारी है---

यह भी पढ़ें : जम्मू में मानसून न रोक दे ट्रेन की रफ्तार, नॉदर्न रेलवे ने की सुरक्षित यात्रा की जबरदस्त तैयारी

ट्रेन के अंदर की जिंदगी

ट्रेन के डिब्बों में यात्रियों के लिए शानदार व्यवस्था होती है, जिसमें शेयर्ड स्लीपिंग कंपार्टमेंट से लेकर प्राइवेट केबिन और डाइनिंग कार शामिल हैं. लेकिन इस ट्रेन की सबसे बड़ी पहचान हर बोगी में रखा ‘समोवार’ है. यह गर्म पानी का एक बड़ा बॉयलर होता है, जहां यात्रियों को पूरे सफर के दौरान मुफ्त गर्म पानी मिलता है. यात्री इसका इस्तेमाल चाय, कॉफी, नूडल्स या इंस्टेंट फूड बनाने के लिए करते हैं, जो अब इस यात्रा की एक खूबसूरत परंपरा बन चुका है.

---खबर नीचे जारी है---

First published on: Jul 08, 2026 05:16 PM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola