अब दिल्ली से धर्मशाला का सफर होगा सिर्फ 6 घंटे में! NHAI का नया प्रोजेक्ट बदल देगा पहाड़ों का रास्ता
NHAI Project: दिल्ली-NCR से धर्मशाला का सफर अभी जितना मुश्किल है, कुछ महीनों के बाद काफी आसान और तेज हो जाएगा. दरअसल, NHAI नए कॉरिडोर पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे NH-503 का कायाकल्प हो जाएगा. आइए जानते हैं इस नए प्रोजेक्ट के बारे में.
दिल्ली और आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है, जिसे जानने के बाद यकीनन आपको भी खुशी होगी. अब दिल्ली-एनसीआर से हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सितंबर से, सड़क मार्ग के जरिए धर्मशाला तक पहुंचना महज 6 घंटे का खेल होगा. अभी जहां इस दूरी को पूरी करने के लिए लोगों को 9 से 11 घंटे का थका देने वाला सफर करना पड़ता है, नए प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह सफर आसान और तेज हो जाएगा. यह बदलाव न सिर्फ समय बचाएगा, बल्कि आपकी यात्रा के अनुभव को भी यादगार बना देगा.
इस बड़ी राहत के पीछे सबसे बड़ा कारण है नेशनल हाईवे-503 (NH-503) का कायाकल्प है. एनएचएआई (NHAI) द्वारा मेहतपुर, ऊना, अंब और रानीताल के बीच लगभग 99 किलोमीटर के इस कॉरिडोर को फोरलेन बनाने का काम तेजी से चल रहा है. इसका सीधा मकसद है कनेक्टिविटी को सुपरफास्ट बनाना. अभी तक लोगों को इस रूट में सफर करने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिसमें तंग रास्ते, जाम, और थकान सफर के मजे को बुरी याद बना देती है, इस समस्या को दूर करने, बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए इस प्रोजेक्ट का पूरा होना बेहद जरूरी है, ताकि इस रूट का सफर आसान हो सके.
खतरनाक मोड़ों से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति
यह काफी आम बात है कि आज के समय में कई पहाड़ों की यात्रा करने पर तीखे और खतरनाक मोड़ का सामना करना पड़ता है, जिससे न सिर्फ ड्राइवर को काफी दिक्कत होती है और गाड़ी की रफ्तार भी धीमा हो जाती है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. कांगड़ा क्षेत्र में बन रहे नए फोरलेन एलाइनमेंट में 'ज्यामितीय खामियों' (geometric deficiencies) को पूरी तरह से दूर किया जा रहा है. रियांड ब्रिज और तारसुह गांव के पास बनने वाली जुड़वां सुरंगें (twin tunnels) अब कांगड़ा बाजार और दाौलतपुर जैसे जाम वाले इलाकों को बाईपास कर देंगी. इससे पालमपुर से चंडीगढ़ तक का सफर भी अब 6 घंटे से घटकर महज साढ़े तीन घंटे का रह जाएगा.
प्रकृति और पर्यटन दोनों का मिलेगा बढ़ावा
बढ़ती कनेक्टिविटी के साथ पर्यटकों की संख्या भी निश्चित रूप से बढ़ेगी, जिससे पहाड़ों की शांति पर असर पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली है. ट्रियंड (Triund) जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या को सीमित करने और कचरा प्रबंधन (waste management) को बेहतर बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं. हमारा उद्देश्य सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि इन खूबसूरत वादियों की सुंदरता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी है. इतना ही नहीं, बीते कुछ समय से IPL जैसे कई अन्य क्रिकेट के खेल धर्मशाला में हो रहे हैं, मैच देखने के लिए आए लोगों के लिए भी यह सफर आसान हो सकेगा.
दिल्ली और आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर सामने आई है, जिसे जानने के बाद यकीनन आपको भी खुशी होगी. अब दिल्ली-एनसीआर से हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहर धर्मशाला तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सितंबर से, सड़क मार्ग के जरिए धर्मशाला तक पहुंचना महज 6 घंटे का खेल होगा. अभी जहां इस दूरी को पूरी करने के लिए लोगों को 9 से 11 घंटे का थका देने वाला सफर करना पड़ता है, नए प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यह सफर आसान और तेज हो जाएगा. यह बदलाव न सिर्फ समय बचाएगा, बल्कि आपकी यात्रा के अनुभव को भी यादगार बना देगा.
इस बड़ी राहत के पीछे सबसे बड़ा कारण है नेशनल हाईवे-503 (NH-503) का कायाकल्प है. एनएचएआई (NHAI) द्वारा मेहतपुर, ऊना, अंब और रानीताल के बीच लगभग 99 किलोमीटर के इस कॉरिडोर को फोरलेन बनाने का काम तेजी से चल रहा है. इसका सीधा मकसद है कनेक्टिविटी को सुपरफास्ट बनाना. अभी तक लोगों को इस रूट में सफर करने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिसमें तंग रास्ते, जाम, और थकान सफर के मजे को बुरी याद बना देती है, इस समस्या को दूर करने, बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए इस प्रोजेक्ट का पूरा होना बेहद जरूरी है, ताकि इस रूट का सफर आसान हो सके.
खतरनाक मोड़ों से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति
यह काफी आम बात है कि आज के समय में कई पहाड़ों की यात्रा करने पर तीखे और खतरनाक मोड़ का सामना करना पड़ता है, जिससे न सिर्फ ड्राइवर को काफी दिक्कत होती है और गाड़ी की रफ्तार भी धीमा हो जाती है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. कांगड़ा क्षेत्र में बन रहे नए फोरलेन एलाइनमेंट में ‘ज्यामितीय खामियों’ (geometric deficiencies) को पूरी तरह से दूर किया जा रहा है. रियांड ब्रिज और तारसुह गांव के पास बनने वाली जुड़वां सुरंगें (twin tunnels) अब कांगड़ा बाजार और दाौलतपुर जैसे जाम वाले इलाकों को बाईपास कर देंगी. इससे पालमपुर से चंडीगढ़ तक का सफर भी अब 6 घंटे से घटकर महज साढ़े तीन घंटे का रह जाएगा.
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प्रकृति और पर्यटन दोनों का मिलेगा बढ़ावा
बढ़ती कनेक्टिविटी के साथ पर्यटकों की संख्या भी निश्चित रूप से बढ़ेगी, जिससे पहाड़ों की शांति पर असर पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने पहले से ही कमर कस ली है. ट्रियंड (Triund) जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या को सीमित करने और कचरा प्रबंधन (waste management) को बेहतर बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं. हमारा उद्देश्य सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि इन खूबसूरत वादियों की सुंदरता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना भी है. इतना ही नहीं, बीते कुछ समय से IPL जैसे कई अन्य क्रिकेट के खेल धर्मशाला में हो रहे हैं, मैच देखने के लिए आए लोगों के लिए भी यह सफर आसान हो सकेगा.