आखिर पुराने मकानों में दो पल्लों वाले दरवाजे ही क्यों होते थे? जानिए इनकी दिलचस्प राज

Double Panel Doors: आपको याद होगा कि पुराने मकानों में दो पल्लों वाले दरवाजे हुआ करते थे. अब तो सिंगल डोर वाले लगाए जाने लगे हैं, लेकिन पहले दो पल्ले वाले दरवाजे क्यों लगाए जाते थे, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं. 

Double Panel Doors

दो पल्लों वाले दरवाजे क्यों बनाए जाते थे? Image Credit- AI

दादी या नानी के घर की तरफ अगर गौर किया जाए उसकी बनावट कुछ अलग मिलती है. दरवाजे, दीवारें और छत आदि को खास तरीके से डिजाइन किया जाता था. हालांकि, अब वक्त के साथ सब कुछ बदल गया है और स्मार्ट तरीके से घर को बनाया जाने लगा है. अगर आपने पुराने घर, हवेलियां या गांव के मकान देखे हैं तो एक बात जरूर नोटिस की होगी कि उनमें ज्यादातर दो पल्लों वाले बड़े-बड़े दरवाजे होते थे. आजकल जहां सिंगल डोर का चलन बढ़ गया है, वहीं पुराने समय में दो पल्लों वाले दरवाजों को खास वजहों से बनाया जाता था. यह सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते थे. 

विज्ञापन

बड़े सामान को आसानी से अंदर ले जाने के लिए

पहले के समय में घरों में बड़े-बड़े फर्नीचर, अनाज की बोरियां, बैलगाड़ी का सामान लाने-ले जाने पड़ते थे. दो पल्लों वाले दरवाजे पूरी तरह खुल जाते थे, जिससे बड़े सामान को अंदर ले जाना आसान हो जाता था. 

विज्ञापन

रोशनी का बेहतर इंतजाम

पुराने घरों में एयर कंडीशनर या एग्जॉस्ट फैन नहीं होते थे. ऐसे में दोनों पल्ले खोलने पर रोशनी घर के अंदर आती थी. इससे घर ठंडा और हवादार बना रहता था. 

विज्ञापन

जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल

दो पल्लों वाले दरवाजों का सबसे बड़ा फायदा यह था कि रोजाना के इस्तेमाल के लिए केवल एक पल्ला खोला जाता था. जब किसी बड़े सामान या ज्यादा लोगों का आना-जाना होता, तब दोनों पल्ले खोल दिए जाते थे.

सैफ का भी था खास ध्यान

मजबूत लकड़ी से बने दो पल्लों वाले दरवाजों में भारी कुंडियां, लोहे की पट्टियां और मोटे ताले लगाए जाते थे. इससे घर की सेफ्टी बेहतर होती थी और दरवाजा लंबे समय तक टिका रहता था. 

विज्ञापन

गर्मी और सर्दी से बचने के लिए 

कई पुराने घरों में लकड़ी के दरवाजे के साथ अंदर की ओर जाली या दूसरा दरवाजा भी होता था. इससे मौसम के अनुसार दरवाजे का इस्तेमाल किया जा सकता था. गर्मियों में हवा आती रहती थी, जबकि सर्दियों में ठंडी हवा को रोका जा सकता था. 

क्या आज भी बनाएं जाते हैं दो पल्लों वाले दरवाजे?

आज भी बड़े बंगले, फार्महाउस, पारंपरिक घर और कई विला में डबल डोर का इस्तेमाल किया जाता है. यह न सिर्फ अच्छे दिखते हैं, बल्कि बड़े सामान और बेहतर वेंटिलेशन के लिए भी इस्तेमाल माने जाते हैं. 

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ