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कौन हैं ‘नाम जुड़वां’? जिनसे परेशान कांग्रेस-BJP जैसे बड़े राजनीतिक दल, वजह जान हो जाएंगे हैरान

ब राजनीतिक दल इस समस्या को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि निकट मुकाबलों में ये वोट विभाजन कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने ईवीएम (EVM) पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं, फिर भी प्रचार में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है.

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अगले महीने 9 अप्रैल को होने वाले केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा किए जा रहे प्रचार अभियान ने जोर पकड़ लिया है, हालांकि इस बीच बीजेपी-कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों को एक पुरानी परेशानी फिर सताने लगी है. अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही नाम के कई निर्दलीय उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल कर दिए हैं, जो मतदाताओं को भ्रमित कर चुनावी नतीजों पर असर डाल सकते हैं. केरल की स्थानीय राजनीतिक भाषा में ऐसे उम्मीदवारों को ‘अपरानमार’ या ‘नाम जुड़वां’ कहा जाता है.

CM पिनारयी विजयन की भी यही समस्या


मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन एक बार फिर से धरमदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. पास के चेडिचेरी से ‘विजयन एएम’ नामक निर्दलीय ने भी नामांकन भर दिया है. ईवीएम पर दो ‘विजयन’ नाम आने से सीपीएम कार्यकर्ता पार्टी चिह्न को प्रमुखता से प्रचारित करने में जुट गए हैं. वहीं, मंत्री ‘पीए मोहम्मद रियास’ बेयपुर से मिलते-जुलते नाम वाले दो निर्दलीयों ‘मोहम्मद रियास पीसी’ और ‘मोहम्मद रियास टीटी’ का सामना कर रहे हैं. वहीं, कलमासेरी में ‘पी राजीव’ का दूसरे ‘राजीव’ से मुकाबला है.

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वोटर्स के भ्रमित होने का डर


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी इससे अछूते नहीं हैं, हरिपद में ‘रमेश चेन्निथला’ का मुकाबला ‘रमेश सी’ नाम के निर्दलीय उम्मीदवार से है. जबकि वट्टियूरकावु में ‘के मुरलीधरन’ को ‘पी मुरलीधरन’ का सामना करना पड़ रहा है. वर्तमान विधायक ‘वीके प्रशांत’ के साथ ‘प्रशांत के’ नाम का उम्मीदवार मैदान में है. भाजपा को भी यही समस्या सता रही है. एनडीए प्रत्याशी ‘राजीव चंद्रशेखर’ नेमोम से लड़ रहे हैं, जहां ‘जीएस राजीव कुमार’ नाम का एक निर्दलीय उतर आया है.

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राजनीतिक दलों के गले की फांस बने नाम जुड़वां


इतना ही नहीं, राज्य अध्यक्ष के सुरेंद्रन को मंजेश्वरम में समान नाम वाला उम्मीदवार ललकार रहा है. 2016 में सुरेंद्रन 89 वोटों से हार गए थे, उस समय भी नामजड़ों को हार का कारण माना गया था. CPI(M) के सीपी जॉन को तिरुवनंतपुरम (सेंटर) में एक अन्य ‘जॉन’ का सामना करना पड़ रहा है. 2011 में कुन्नमकुलम में वे 400 से थोड़े अधिक वोटों से हारे थे, जब समान नाम वाले उम्मीदवार ने 800 वोट हासिल किए थे. निलंबूर में एलडीएफ-समर्थित ‘पीवी अनवर’ को ‘अनवर मोईदीन’, ‘अनवर अली’ और ‘अनवर एनएम’ जैसे कई नामजड़ों का सामना करना होगा.

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चुनाव आयोग ने दिया स्पष्ट निर्देश


आगे भी ऐसे कई उदाहरण हैं, जैसे इडुक्की जिले के ‘देविकुलम’ में एलडीएफ के ‘ए राजा’, यूडीएफ के ‘एफ राजा’ और भाजपा के ‘एस राजेंद्रन’ जैसे नाम-समान उम्मीदवारों ने स्थानीय चर्चा छेड़ दी है. अब राजनीतिक दल इस समस्या को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि निकट मुकाबलों में ये वोट विभाजन कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने ईवीएम (EVM) पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं, फिर भी प्रचार में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है.

First published on: Mar 26, 2026 09:35 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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