संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रही रार अब दिल्ली से निकलकर तमिलनाडु की सियासत तक पहुंच गई है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक के बाद एक तीखे प्रहार करते हुए डीएमके और कांग्रेस गठबंधन पर महिलाओं के अवसर छीनने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष की ‘अंधी नफरत’ राज्य की महिलाओं की उम्मीदों को नुकसान पहुंचा रही है.
वित्त मंत्री ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी के एक्स पोस्ट के बयान का हवाला देते हुए लिखा कि विपक्ष ने केवल पीएम मोदी के प्रति अपनी नफरत के कारण तमिलनाडु को संसद और विधानसभा में महिलाओं के उचित प्रतिनिधित्व का मौका गंवा दिया है. उन्होंने राहुल गांधी और एमके स्टालिन की लीडरशिप पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनकी ‘छोटी सोच’ और ‘जिद्दी व्यवहार’ के कारण तमिलनाडु को फायदे के बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है.
Former CM of TN Thiru @EPSTamilNadu captures effectively how the hate-filled opposition led by @INCIndia @RahulGandhi and by @arivalayam Thiru @mkstalin have made TN lose out on an opportunity for women’s representation in the Parliament and Assembly. Blind hate has damaged the… https://t.co/wXvm2zNdBa
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) April 18, 2026
निर्मला सीतारमण ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम ने एक ‘विन-विन प्रपोजिशन’ पेश किया था, जिससे महिलाओं को सीधा लाभ होता.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है, ‘तमिलनाडु के पूर्व सीएम एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने अच्छे से बताया है कि कैसे कांग्रेस के राहुल गांधी, एमके स्टालिन की लीडरशिप में नफरत से भरे विपक्ष ने तमिलनाडु को पार्लियामेंट और असेंबली में महिलाओं के रिप्रेजेंटेशन का मौका गंवा दिया है. अंधी नफरत ने आम तौर पर राज्य और खासकर महिलाओं की उम्मीदों को नुकसान पहुंचाया है. छोटी सोच वाली, जिद्दी, बिना सोच वाली और महिला विरोधी डीएमके की वजह से, तमिलनाडु को फायदा होने के बजाय और नुकसान हो सकता है. आपने पीएम मोदी के भरोसे के मुताबिक, विन-विन प्रपोजिशन का हिस्सा बनने से मना कर दिया.’
तमिलनाडु की राजनीति में क्यों मची खलबली?
वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में बहस छिड़ी हुई है. बीजेपी का तर्क है कि विपक्ष केवल राजनीति के लिए महिलाओं के सशक्तिकरण में रोड़ा अटका रहा है, जबकि विपक्षी दल इसे 2029 की चुनावी गोटियां सेट करने का जरिया बता रहे हैं.










