विपक्ष में फूट का फायदा उठाने की फिराक में NDA? मानसून सत्र को लेकर 'महा-प्लान' बना रही मोदी सरकार

एनडीए सरकार संसद के मानसून सत्र में तीन बड़े रिफॉर्म्स ‘परिसीमन विधेयक 2026’, ‘महिला आरक्षण संशोधन’ और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ को पटल पर रख सकती है.

Lok sabha

केंद्र की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी हलचल संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर है, जो जुलाई के तीसरे हफ्ते से शुरू होने जा रहा है. सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इस सत्र में बहुप्रतीक्षित और विवादित परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है. हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में हुई बड़ी बगावत ने इस चर्चा को और हवा दे दी है. अगर बीजेपी की यह रणनीति सफल रहती है, तो न केवल परिसीमन बिल, बल्कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ और ‘महिला आरक्षण’ जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता भी साफ हो जाएगा.

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अप्रैल की हार और ‘विशेष बहुमत’ की चुनौती

2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को दोबारा तय करने वाला ‘संविधान विधेयक, 2026’ इसी साल अप्रैल में संसद में गिर गया था. किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने के लिए संसद में ‘विशेष बहुमत’ यानी सदन में मौजूद और वोट करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है. इस परिसीमन विधेयक को महिला आरक्षण बिल के साथ जोड़ा गया था, जिसके कारण 2029 से लागू होने वाला 33% महिला आरक्षण बिल भी अधर में लटक गया. अप्रैल के इस झटके के बाद से ही नरेंद्र मोदी सरकार संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा जुटाने की कोशिश कर रही है.

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TMC में बगावत और DMK से बातचीत

एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से लिखा है, हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने एनडीए की स्थिति को अचानक बेहद मजबूत कर दिया है. सरकार का यह नया गणित मुख्य रूप से दो बड़े क्षेत्रीय दलों टीएमसी और डीएमके के इर्द-गिर्द घूम रहा है. लोकसभा में ममता बनर्जी की पार्टी के कुल 29 सांसद हैं. सोमवार को टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है, जो दलबदल विरोधी कानून के तहत पार्टी को बिना सदस्यता गंवाए तोड़ने के लिए पर्याप्त है. ये बागी सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर बैठक भी कर चुके हैं. ये 20 सांसद संसद में एक अलग गुट बनाकर एनडीए को समर्थन दे सकते हैं, जिससे लोकसभा में एनडीए का आंकड़ा पहली बार 300 के पार निकल जाएगा.

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वहीं, हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने दक्षिण का समीकरण बदल दिया है. तमिलनाडु में डीएमके चुनाव हार गई है, और उसके पुराने सहयोगी कांग्रेस ने विजय की नई पार्टी टीवीके का हाथ थाम लिया है. इस हार के बाद डीएमके के 22 सांसदों द्वारा संसद में एनडीए को ‘मुद्दे के आधार पर’ सशर्त समर्थन देने की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं.

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लोकसभा का पूरा नंबर गेम

543 सदस्यों वाली लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 वोटों की जरूरत है. लेकिन वर्तमान में तीन सीटें सांसदों के निधन के कारण खाली हैं. इस लिहाज से प्रभावी जादुई आंकड़ा घटकर 360 रह जाता है. एनडीए के मौजूदा 293 सांसद हैं. इसके अलावा अगर टीएमसी के 20 बागी सांसद और डीएमके के मुद्दा-आधारित समर्थन मिलने पर 22 सांसदों का साथ मिलने पर यह संख्या 335 हो जाती है. इसके अलावा एनडीए की नजर शिवसेना (UBT) में संभावित टूट पर भी है, जिससे उन्हें छह और सांसदों का समर्थन मिल सकता है. वहीं, अप्रैल में वोटिंग के दौरान मिले एनडीए को अपने सांसदों के अलावा 5 और सांसदों का समर्थन मिला था. इस पूरे जोड़-तोड़ के बाद एनडीए का संभावित आंकड़ा 346 से 348 तक पहुंच सकता है. सरकार को भरोसा है कि बचे हुए 12-14 वोटों की कमी को अन्य छोटी पार्टियों, निर्दलीय सांसदों और विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग के जरिए आसानी से पूरा कर लिया जाएगा.

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मानसून सत्र में क्या है सरकार का एजेंडा?

रिपोर्ट में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक लिखा गया है कि, सरकार मानसून सत्र में इन बड़े विधेयकों को तभी पटल पर रखेगी जब वह दो-तिहाई बहुमत की दहलीज को पूरी तरह पार कर लेगी. इस रणनीतिक तैयारी के निशाने पर तीन बड़े रिफॉर्म्स परिसीमन विधेयक 2026, महिला आरक्षण संशोधन और एक राष्ट्र, एक चुनाव हैं.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

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आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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