‘मुझे अपने घर का किराया देना होता है. मकान मालिक यह नहीं देखता कि आप भाजपा में हैं या किसी अन्य दल में, उसे महीने की पहली तारीख को किराया चाहिए होता है. कोई भी राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को सैलरी नहीं देता. इसलिए 24 घंटे राजनीति को समर्पित करना अब मेरे लिए मुमकिन नहीं था’ यह कहना है भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने वाले शहजाद पूनावाला का. पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है. एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने पार्टी छोड़ने की मुख्य वजह अपनी गंभीर आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों को बताते हुए कहा कि वह जिंदगी की जमीनी हकीकतों से मुंह नहीं मोड़ सकते.
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‘बेटे का कर्तव्य निभाना पहली प्राथमिकता’
शहजाद पूनावाला ने बताया कि कुछ समय पहले उनकी मां का एक्सीडेंट हो गया था, जिसके बाद उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर आ गई है. उन्होंने कहा कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और एक बेटे का कर्तव्य निभाने के लिए उन्हें समय की जरूरत थी. इसी वजह से उन्होंने 30 जुलाई को अपना इस्तीफा सौंपा था, जिसे पार्टी के साथ लंबी बातचीत के बाद स्वीकार कर लिया गया. उन्होंने कहा कि पार्टी से उन्हें कोई शिकायत नहीं है और न ही वह उम्मीद करते हैं कि पार्टी उनका निजी खर्च उठाए.
फिर से कॉर्पोरेट सेक्टर में करेंगे नौकरी
भाजपा छोड़ने के बाद अपने अगले कदम पर बात करते हुए पूनावाला ने कहा कि वह पहले कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करते थे और अब घर चलाने के लिए उन्हें दोबारा उसी क्षेत्र में लौटना होगा. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि वह किस कंपनी में जाएंगे, लेकिन वह अपनी योग्यता के आधार पर ही काम तलाशेंगे.
‘व्यवस्था छोड़ी है, विचार नहीं’
शहजाद पूनावाला ने साफ किया कि उनका यह फैसला भाजपा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों से नाराजगी की वजह से नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं व्यवस्था छोड़ रहा हूं, व्यक्ति या विचार नहीं. पीएम मोदी के विजन और पार्टी की विचारधारा के प्रति मेरा समर्थन हमेशा बना रहेगा. पूनावाला ने 17 अगस्त को भाजपा अध्यक्ष को अपना औपचारिक इस्तीफा भेजा था, जिसे लेकर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है.
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