बार-बार टॉन्सिल की समस्या होना क्या नॉर्मल है? एक्सपर्ट से जानिए कब बन सकती है सर्जरी की जरूरत
Tonsils Reasons: अगर आपको या आपके बच्चे को बार-बार टॉन्सिल की समस्या हो रही है तो किसी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. सही समय पर जांच से सर्जरी से बचा जा सकता है.
Edited By : Shadma Muskan|Updated: Jun 29, 2026 09:38
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बार-बार टॉन्सिल की समस्या होना क्या नॉर्मल है? Image Credit- Freepik
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Tonsils Reasons: टॉन्सिल गले के दोनों तरफ मौजूद छोटे ऊतक होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को बार-बार टॉन्सिल में सूजन और संक्रमण की समस्या होती है, जिससे गले में दर्द, बुखार और निगलने में परेशानी जैसी दिक्कत होने लगती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या टॉन्सिल हटाने की सर्जरी करानी चाहिए. इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर राजेश भारद्वाज (कंसल्टेंट, मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर) का कहना है कि टॉन्सिल में संक्रमण आमतौर पर वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है. इसलिए वक्त पर ध्यान देने की खास जरूरत है.
ज्यादातर मामलों में दवाओं और आराम से यह समस्या ठीक हो जाती है, लेकिन जब संक्रमण बार-बार होने लगे और व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तब डॉक्टर सर्जरी पर विचार कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को एक साल में कई बार टॉन्सिलाइटिस हो रहा है या लगातार कई सालों तक बार-बार संक्रमण की शिकायत बनी रहती है तो टॉन्सिल हटाने की सर्जरी यानी टॉन्सिल्लेक्टोमी की सलाह दी जा सकती है.
अगर ये लक्षण आए नजर
टॉन्सिल इतने बड़े हो जाएं कि सांस लेने, सोने या खाना निगलने में परेशानी होने लगे तब भी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, कुछ मामलों में टॉन्सिल के कारण बार-बार गले में मवाद बनना, टॉन्सिल के आसपास फोड़ा (एब्सेस) होना या एंटीबायोटिक दवाओं से भी आराम न मिलना सर्जरी का कारण बन सकता है.
बच्चों में बड़े टॉन्सिल के कारण
बच्चों में बड़े टॉन्सिल के कारण खर्राटे आना या स्लीप एपनिया जैसी समस्या होने पर भी डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं. हालांकि, हर बार टॉन्सिल की समस्या होने का मतलब यह नहीं है कि सर्जरी जरूरी है. डॉक्टर मरीज की उम्र, संक्रमण की गंभीरता, बार-बार होने की आवृत्ति और उसके स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखकर फैसला लेते हैं. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के सर्जरी का निर्णय नहीं लेना चाहिए.
अगर आपको या आपके बच्चे को बार-बार टॉन्सिल की समस्या हो रही है तो किसी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. सही समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं से बचा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर सर्जरी का निर्णय भी आसानी से लिया जा सकता है.
Tonsils Reasons: टॉन्सिल गले के दोनों तरफ मौजूद छोटे ऊतक होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं. हालांकि, कुछ लोगों को बार-बार टॉन्सिल में सूजन और संक्रमण की समस्या होती है, जिससे गले में दर्द, बुखार और निगलने में परेशानी जैसी दिक्कत होने लगती हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या टॉन्सिल हटाने की सर्जरी करानी चाहिए. इसको लेकर एक्सपर्ट डॉक्टर राजेश भारद्वाज (कंसल्टेंट, मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर) का कहना है कि टॉन्सिल में संक्रमण आमतौर पर वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है. इसलिए वक्त पर ध्यान देने की खास जरूरत है.
ज्यादातर मामलों में दवाओं और आराम से यह समस्या ठीक हो जाती है, लेकिन जब संक्रमण बार-बार होने लगे और व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तब डॉक्टर सर्जरी पर विचार कर सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को एक साल में कई बार टॉन्सिलाइटिस हो रहा है या लगातार कई सालों तक बार-बार संक्रमण की शिकायत बनी रहती है तो टॉन्सिल हटाने की सर्जरी यानी टॉन्सिल्लेक्टोमी की सलाह दी जा सकती है.
अगर ये लक्षण आए नजर
टॉन्सिल इतने बड़े हो जाएं कि सांस लेने, सोने या खाना निगलने में परेशानी होने लगे तब भी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. हालांकि, कुछ मामलों में टॉन्सिल के कारण बार-बार गले में मवाद बनना, टॉन्सिल के आसपास फोड़ा (एब्सेस) होना या एंटीबायोटिक दवाओं से भी आराम न मिलना सर्जरी का कारण बन सकता है.
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बच्चों में बड़े टॉन्सिल के कारण
बच्चों में बड़े टॉन्सिल के कारण खर्राटे आना या स्लीप एपनिया जैसी समस्या होने पर भी डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह दे सकते हैं. हालांकि, हर बार टॉन्सिल की समस्या होने का मतलब यह नहीं है कि सर्जरी जरूरी है. डॉक्टर मरीज की उम्र, संक्रमण की गंभीरता, बार-बार होने की आवृत्ति और उसके स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को देखकर फैसला लेते हैं. इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के सर्जरी का निर्णय नहीं लेना चाहिए.
अगर आपको या आपके बच्चे को बार-बार टॉन्सिल की समस्या हो रही है तो किसी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है. सही समय पर जांच और उपचार से जटिलताओं से बचा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर सर्जरी का निर्णय भी आसानी से लिया जा सकता है.