PCOS Symptoms: पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ऑवरी सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो जीवनशैली से जुड़ी है और औरतों की सेहत पर कई तरह से असर डाल सकती है. इसका नाम बदलकर अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम /यानी PMOS कर दिया गया है. हालांकि, ज्यादातर महिलाएं अब भी इसे पीसीओएस के नाम से ही जानती हैं. कई महिलाएं लंबे समय तक पीसीओएस के लक्षणों को आम दिक्कतें समझकर इग्नोर करती रहती हैं जिससे दिक्कतें बढ़ती जाती हैं. ऐसे में समय रहते पीसीओएस के लक्षणों को मैनेज करना जरूरी होता है. इसी बारे में बता रही हैं AIIMS, नई दिल्ली में स्त्री रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. जूही भारती. जानिए PCOS के क्या लक्षण हैं, इसका क्या इलाज है और प्रेग्नेंसी पर इसका क्या असर पड़ता है.
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PCOS के क्या लक्षण हैं
डॉ. जूही भारती के अनुसार, पीसीओएस में ये कुछ सामान्य लक्षण हैं जो नजर आ सकते हैं –
- अनियमित पीरियड्स यानी कभी पीरियड्स बहुत कम आते हैं, कभी बहुत ज्यादा आते हैं या फिर आते ही नहीं हैं
- चेहरे, छाती या पीठ पर ज्यादा बाल आते हैं
- मुंहांसे ज्यादा निकलते हैं या स्किन ऑयली रहती है
- सिर के बाल पतले होना या झड़ना
- वजन बढ़ना
- गर्दन, जांघों और स्तन के नीचे की त्वचा का गहरा होना
- गर्भधारण में दिक्कत आना.
PCOS होने का क्या कारण है
डॉ. जूही भारती बताती हैं कि पीसीओएस होने का कारण अबतक पता नहीं चला है लेकिन इसका संबंध हार्मोन के असंतुलन से है. खासकर पुरुष हार्मोन, जिन्हें एंड्रोजन कहते हैं, उनके बढ़ने से यह हो सकता है. यह अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी स्थिति से जु़ड़ा होता है जिससे वजन बढ़ सकता है. ऐसे में अगर आपको लगता है कि आपको या आपके जानने वाले को पीसीओएस है तो गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें. गायनेकोलॉजिस्ट जांच करेंगे और अल्ट्रासाउंड करके पता करेंगे कि PCOS है या नहीं. डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के अलावा ब्लड टेस्ट भी कर सकते हैं.
PCOS का इलाज कैसे होता है
जीवनशैली में बदलाव – पीसीओएस के इलाज के लिए गायनेकोलॉजिस्ट पीसीओएस के लक्षणों को मैनेज करना सिखाएंगे. प्रोफेसर बताती हैं कि पीसीओएस का कोई सीधा इलाज नहीं है लेकिन जीवनशैली में बदलाव करके पीसीओएस को मैनेज किया जा सकता है. खानपान में फल और सब्जियां शामिल करके, प्रोसेस्ड फूड्स से बचकर, रोजाना कम से कम 30 मिनट तक ऐसा व्यायाम करना जिससे पसीना आए, किया जा सकता है.
गर्भनिरोधक गोलियां- अनियमित पीरियड्स के लिए डॉक्टर की सुझाई गर्भनिरोधक गोलियां मदद कर सकती हैं. यह गोलिया पीरियड को नियमित करने में मदद करती हैं.
हेयर रिमूवर – शरीर पर नजर आने वाले ज्यादा बालों के लिए वैक्सिंग, शेविंग और लेजर हेयर रिमूवल जैसे तरीके काम आ सकते हैं.
वेट कंट्रोल- डॉक्टर इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन कंट्रोल करने के लिए कुछ दवाएं भी दे सकते हैं.
PCOS और मां बनने में दिक्कत
लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं को पीसीओएस के कारण प्रेग्नेंसी (Pregnancy) में दिक्कत आती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सामान्य मासिक धर्म में हर महीने 1 अंडा निकलता है लेकिन पीसीओएस में हार्मोन के असंतुलन के कारण अंडा अनियमित या अप्रत्याशित रूप से निकलता है. ऐसे में जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है. वजन कम किया जाए तो ओव्यूलेशन समय पर हो सकता है. इसके अलावा, दवाओं से भी मदद मिलती है. अंडाशय को संक्रिय करने के लिए कभी-कभी इंजेक्शन की भी जरूरत पड़ सकती है. अगर दवा और इंजेक्शन के बाद भी गर्भधारण नहीं होता है तो IVF की सहायता ली जा सकती है.
डॉक्टर बताती हैं कि समय पर इलाज से बहुत फर्क पड़ सकता है. सही देखभाल और सपोर्ट से पीसीओएस को मैनेज करना मुमकिन है.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.