Lung Cancer: ये 7 लोग फेफड़ों के कैंसर का हो सकते हैं शिकार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताए कारण और रिस्क फैक्टर्स

Lung Cancer Risk Factors: स्वास्थ्य मंत्रालय के भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने ऐसे कुछ रिस्क फैक्टर्स बताए हैं जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं. धूम्रपान के अलावा इन चीजों से बचकर रहने पर फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है.

Lung Cancer Risk Factors

फेफड़ों के कैंसर के मुख्य कारण क्या हैं? AI Generated Image

Lung Cancer Causes: फेफड़ों का कैंसर ऐसा कैंसर है जो फेफड़ों में पनपता है और शरीर के अन्य अंगों और लिम्फ नोड्स तक पहुंच सकता है. यह कैंसर फेफड़ों से निकलकर दिमाग तक भी जा सकता है. फेफड़ों के कैंसर (Fefdo Ka Cancer) से फेफड़ों की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है और यह व्यक्ति के लिए जानलेवा हो सकता है. इसीलिए फेफड़ों के कैंसर से बचना जरूरी है. स्वास्थ्य मंत्रालय के भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, यहां फेफड़ों के कैंसर के कुछ रिस्क फैक्टर्स दिए गए हैं जो फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं. इन रिस्क फैक्टर्स से दूर रहकर व्यक्ति फेफड़ों के कैंसर से बच सकता है.

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किन लोगों को है फेफड़ों के कैंसर का ज्यादा खतरा

ICMR के अनुसार, ये 7 रिस्क फैक्टर्स (Risk Factors) फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं –

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन

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तंबाकू का चाहे किसी भी तरह से सेवन किया जाए यह खतरनाक होता है. सिगरेट या बीढ़ी पीने वालों में फेफड़ों के कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है. इन लोगों में लिप, ओरल कैविटी, गले, पाचन नली और श्वसन नली का कैंसर हो सकता है. तंबाकू में मौजूद केमिकल्स फेफड़ों की सेल्स को नष्ट करते हैं और एब्नॉर्मल सेल्स के बढ़ने की वजह बनते हैं.

सैकंड हैंड स्मोकिंग

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जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं लेकिन उनके आस-पास कोई सिगरेट या बीढ़ी पीता है और वे लगातार उस धुएं की चपेट में आते हैं तो इस सैकंड हैंड स्मोकिंग के कारण गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं. इन लोगों में सैकंड हैंड स्मोकिंग का खतरा भी बढ़ जाता है.

केमिकल कार्सिनोजेन

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काम की जगह पर अगर व्यक्ति लगातार आर्सेनिक, क्रोमियम, डीजल एग्जॉस्ट, सिलिका और निकेल की चपेट में आता है तो इसे ओक्यूपेशनल एक्सपोजर टू केमिकल कार्सिनोजेन्स कहते हैं. रबड़, आयरन और स्टील बनाना भी कैंसर का रिस्क फैक्टर हो सकता है. इसके अलावा, एस्बेसटॉस की चपेट में आना भी खतरनाक हो सकता है, इसे ह्यूमन कार्सिनोजेन कहा जाता है. स्मोकिंग, केमिकल्स की चपेट में आना और एस्बेस्टॉस का एक्सपोजर, एकसाथ इनका कोंबिनेशन खतरनाक हो सकता है.

रेडोन एक्सपोजर

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रेडोन का एक्सपोजर कुछ तरह के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है जिसमें फेफड़ों का कैंसर भी शामिल है. रेडोन ना दिखने वाली बिना महक वाली गैस है जो गंदगी और यूरेनियम ब्रेकडाउन होने पर पत्थरों से निकलती है और जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसमें मिल जाती है.

पारिवारिक इतिहास

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अगर किसी के परिवार में किसी को फेफड़ों का कैंसर रहा हो तो उस व्यक्ति में भी फेफड़ों का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है. कैंसर सर्वाइवर जिनकी छाती के आस-पास रेडिएशन थेरेपी हुई है उन्हें भी फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा रहता है.

घर के अंदर कोयला जलाना

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घर के अंदर कोयला जलाना, चाहे खाना पकाने के लिए हो या फिर गर्माहट के लिए, फेफड़ों के कैंसर की संभावना बढ़ा देता है. खासतौर से जिन घरों में वेंटिलेशन की कमी है वहां कोयला जलाना सेहत को खराब कर सकता है.

फेफड़ों का इंफेक्शन

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फेफड़ों से जुड़े इंफेक्शन (Lung Infection) जैसे क्लाइमिडिया न्यूमोनिया या टीबी जैसी बीमारी स्कार टिशू के बढ़ने का कारण बन सकती है. इससे फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है.

फेफड़ों के कैंसर के क्या लक्षण हैं

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फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती स्टेज में कुछ इस तरह के लक्षण (Lung Cancer Symptoms) नजर आ सकते हैं –

  • लंबे समय तक खांसी आना और ठीक ना होना
  • सांस फूलना
  • बलगम में खून आना
  • खांसते हुए खून आना
  • छाती या कंधों में दर्द रहना
  • बिना किसी कारण वजन कम होना
  • व्हीजिंग होना
  • हर समय थकान महसूस होना
  • भूख का कम हो जाना

फेफड़ों की कैंसर के एडवांस होने पर ये लक्षण भी दिख सकते हैं –

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  • कुछ निगलने में दिक्कत होना
  • आवाज में खराश आ जाना
  • गले के पास सूजन होना
  • बार-बार न्यूमोनिया होना
  • पसलियों के नीचे दर्द महसूस होना
  • उंगलियों या नाखूनों का शेप बदल जाना
  • कंधों में दर्द होना और दर्द का हाथों तक फैलना.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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Source - ICMR

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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